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वो 9 बातें जो सिनेमाघर वाले हमसे छुपाते हैं!

Published on 2 August, 2017 at 4:52 pm By

सिनेमाघरों में फ़िल्म देखने का उत्साह इतना होता है कि बहुत सी चीजें अनदेखी रह जाती हैं। अपने फेवरिट स्टार को बड़े परदे पर देखते हुए बहुत सी छोटी मगर महत्वपूर्ण बातें नजरों से बचकर निकल जाती है। यूं कहें कि रंगीन परदे की दुनिया में सब कुछ खो सा जाता है। हम सिनेमाघरों में जाते हैं, बैठते हैं, बातें करते हैं, खाते-पीते हैं, फिल्म देखते हैं और उठकर चले जाते हैं। लेकिन इस बीच जिन चीजों को आप मिस कर जाते हैं, उन्हें यहां हम रखने जा रहे हैं। इसके बारे में सिनेमाघर वाले आपको कभी नहीं बता सकते।

1. सिनेमाघर साफ़-सुथरा दिखता है, रहता नहीं है।


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बाहरी चकाचौंध में हम फंसे रहते हैं और देख नहीं पाते कि सिनेमाघर अन्दर से कितना गंदा है। एक के बाद एक शो चला कर कमाई करने के चक्कर में सिनेमाघर साफ़-सफाई से वंचित रह जाता है। सिनेमाघर के कर्मचारियों के पास इतना वक़्त ही नहीं होता कि वो इसकी सफ़ाई ढंग से कर सकें। रात के वक्त जब कोई शो नहीं होता, तब इसकी हल्की सफाई की जाती है, जो नाकाफी होता है।

2. हॉल की तेज़ आवाज़ आपको बहरा बना सकता है।

आजकल सिनेमाघरों में ज़बरदस्त साउंड सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है। इन साउंड सिस्टम्स की आवाज़ कई बार इतनी तेज़ होती है कि आपके कानों पर बुरा असर डालती है। खासकर एक्शन वाले सीन में इसकी आवाज बहुत जोर से आती है जो कान के लिए ठीक नहीं है।

3. कुर्सियों के नीचे कबाड़ होता है।

चौंकिए मत। हम जो फिल्म देखते हुए जो खाते-पीते हैं वो सभी वेस्टेज नीचे फेंकते हैं जो कुर्सी के नीचे दबा रहता है। सफाई में कमी होने पर ये जमा होता जाता है। वैसे भी जहां-तहां फेंकने से बेहतर है कुर्सी के नीचे रहे।

4. पॉपकॉर्न की महंगाई छुपी नहीं है।


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फ़िल्म देखते वक़्त पॉपकॉर्न खाना हम प्रेफर करते हैं। यदि हम ये सिनेमाघर से लेते हैं तो हमें दोगुने दाम पर मिलते हैं। सिनेमाघरों में खाने-पीने की चीजें महंगी होती हैं जो जेब ढीली कर देती है।

5. सिनेमाघर वालों की नज़र होती है आप पर



कार्नर सीट पर बैठ कर इश्क़ फरमाने वाले कपल को समझना चाहिए कि बेशक आप अंधेरे में बैठे हों, पर हॉल में लगे ख़ुफ़िया कैमरे आप पर भी नज़र गड़ाये हुए होते हैं। इसलिए अबकी बार कुछ करने से पहले ज़रा ध्यान रखियेगा कि कहीं कोई तीसरा तो नजर गड़ाए नहीं है।

6. पॉपकॉर्न की खुशबू क्यों होती है अलग?

सिनेमाघर में मिलने वाले पॉपकॉर्न की खुशबू कुछ ऐसी होती है कि न चाहने के बावजूद आप इसे आर्डर कर ही देते हैं। इसके लिए सिनेमाघर वाले अपनी ख़ास रेसेपी का इस्तेमाल करते हैं, जिससे ग्राहकों को इसकी तरफ़ लुभा सकें।

7. पहले नहीं रहते थे सीटों पर कप होल्डर्स।

फ़िल्म देखते वक़्त अपनी ड्रिंक्स को आपने कई बार सीट पर लगे कप होल्डर में रखा होगा, पर क्या आप जानते हैं कि 1981 से पहले इनका इस्तेमाल नहीं होता था।

8. कॉम्बो डील लगाते हैं जेब में सेंध।

सिनेमाघरों तक खींचने के लिए बेशक वो कॉम्बो डील जैसे कई लुभावने ऑफ़र देते हों, पर सच्चाई ये है कि इससे आपको कोई फ़ायदा नहीं होता। सभी चीज़ों को अलग-अलग खरीद कर आप कॉम्बो डील से ज़्यादा पैसे बचा सकते हैं।

9. हर बार पॉपकॉर्न नहीं होते फ़्रेश।

दिखने में बेशक ये पॉपकॉर्न फ़्रेश लगते हों, पर असलियत ये है कि ज़्यादा बने हुए पॉपकॉर्न को कर्मचारी प्लास्टिक की थैलियों में बंद करके रख देते हैं, जिन्हें अगले दिन दोबारा गर्म करके बेच दिया जाता है।


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Source: brightside

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