कभी पिता ने कहा था मत करो नौकरी, आज उसी मुमताज को राष्ट्रपति ने ‘नारी शक्ति पुरस्कार’ से किया सम्मानित

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Updated on 9 Mar, 2017 at 6:14 pm

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एक महिला से कहा जाता है कि उसे पुरुष प्रधान पेशे में हाथ नहीं आजमाना चाहिए। कुछ लोगों का मानना है कि महिलाएं खुद दो पुरुष प्रधान पेशे में सहज महसूस नहीं कर सकतीं। उन पेशों में से एक है ड्राइविंग।

हालांकि, इन धारणाओं को तोड़ते हुए मुमताज एम. काजी ने तीन साल पहले एशिया की पहली महिला डीजल इंजन ट्रेन चालक होने का गौरव प्राप्त किया था। अब आठ मार्च को उन्हें अंतर्राष्ट्रीय नारी दिवस के मौके पर ‘नारी शक्ति पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है।

महिलाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी 45 वर्षीया मुमताज उन सात महिलाओं में से एक है, जिन्हें इस साल राष्ट्रपति के हाथों पुरस्कार प्राप्त हुआ।

छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस-ठाणे खंड पर मध्य रेलवे की उपनगरीय लोकल ट्रेन की चालक मुमताज को कई तरह के ट्रेन के परिचालन में महारत हासिल है।



वह पिछले 25 सालों से ट्रेन चला रही हैं लेकिन उनके लिए ये सब करना आसान नहीं था।

एक रूढ़िवादी मुस्लिम परिवार से आनेवाली मुमताज ने 1989 में सांताक्रूज उपरनगर के सेठ आनंदीलाल पोद्दार हाईस्कूल से अपनी शिक्षा ली। इसी बीच, मुमताज ने रेलवे में नौकरी का आवेदन किया।

मुमताज के विरोध में जो सबसे पहले खड़े थे वह थे उनके पिता अल्लारखू इस्माइल काथवाला, जो खुद रेलवे में काम करते थे। बाद में अन्य परिवारजनों के मनाने पर उनके पिता मान गए। आज पूरे परिवार को अपनी इस बेटी पर गर्व है।

mumtaz

ndtv


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