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मोपला विद्रोह के दौरान हिन्दुओं का किया गया नरसंहार

Published on 20 August, 2017 at 7:11 pm By

आज ही के दिन 20 अगस्त 1921 को केरल के मालाबार इलाके में मोपला विद्रोह की शुरुआत हुई थी। मालाबार के मुसलमानों का यह विद्रोह शुरू में खिलाफत आंदोलन के समर्थन में और अंग्रेजों के खिलाफ था, लेकिन जल्द ही यह साम्प्रदायिक हिंसा में तब्दील हो गया।

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मोपला विद्रोह को कुचलने जाते हुए ब्रिटिश सैनिक।

मोपला मुलसमानों के निशाने पर बड़े पैमाने पर हिन्दू आए। साम्प्रदायिक हिंसा में हजारों हिन्दुओं की हत्या कर दी गई। हजारों का धर्म परिवर्तन कर मुसलमान बना दिया गया। हिन्दू महिलाओं के साथ बलात्कार किए गए।


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मोपला विद्रोह को जानने से पहले खिलाफत आंदोलन के बारे में जानना जरूरी है।

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खिलाफत आंदोलन।

स्कूल में पढ़ाए जाने वाले इतिहास की पुस्तकों में खिलाफत आंदोलन को भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से जोड़ते हुए कुछेक पैराग्राफ में समेट दिया गया है। हालांकि, यह आंदोलन न केवल राष्ट्र-विरोधी था, बल्कि हिन्दू विरोधी भी था। इस आंदोलन को महात्मा गाँधी, शौकत अली, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद जैसे नेताओं का सहयोग प्राप्त था।

प्रथम विश्व युद्ध में तुर्की की हार हुई थी। इसके बाद अंग्रेजों ने वहां के खलीफा को गद्दी से हटा दिया था।

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तुर्की का खलीफा।



खिलाफत आंदोलन का लक्ष्य तुर्की के सुलतान की गद्दी वापस दिलाना था। इस आंदोलन को तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष महात्मा गांधी का समर्थन प्राप्त था। गांधी ने असहयोग आंदोलन को खिलाफत आंदोलन से जोड़ने पर बल दिया। उनका तर्क था कि असहयोग को खिलाफ़त के साथ मिलाने से भारत के दो प्रमुख समुदाय हिन्दू और मुसलमान मिलकर औपनिवेशिक शासन का अंत कर देंगे। हालांकि, यह बात दूर की कौड़ी ही साबित हुई।

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खिलाफत आंदोलन को महात्मा गांधी, मौलाना अबुल कलाम आजाद सरीखे कांग्रेस नेताओं का समर्थन प्राप्त था।

इतिहासकारों की राय है कि असहयोग आंदोलन का दरअसल कोई राष्ट्रीय लक्ष्य नहीं था। बल्कि यह आंदोलन मुसलमानों द्वारा चलाए जा रहे खिलाफत आंदोलन के समर्थन में हिन्दुओं को एकजुट करने की कवायद भर थी। इसका विरोध भी हुआ, लेकिन महात्मा गांधी का कहना था कि जो खिलाफत का विरोधी है वह कांग्रेस का भी शत्रु है। इसका एक दूसरा दृष्टिकोण भी है। इसके मुताबिक, महात्मा गांधी मानते थे कि 12वीं सदी से साथ-साथ रहते हुए हिन्दू और मुसलमान सह-अस्तित्व सीख चुके हैं। दोनों ही समुदायों में दबंग लोग जरूर थे, लेकिन फिर भी भारत के आम हिन्दू-मुसलमान पारंपरिक हिन्दू जीवन दर्शन को ही मानते थे। वह साझी विरासत को अधिक तवज्जो देते थे। खिलाफत आंदोलन व असहयोग आंदोलन को एक करने के पीछे संभवतः यही दृष्टिकोण रहा होगा।

मोपला में मुसलमानों का विद्रोह

 

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मोपला की जेल में कैदी।

हालांकि, खिलाफत आंदोलन न केवल अंग्रेजों के बल्कि धीरे-धीरे हिन्दुओं के खिलाफ हो गया। क्रमशः पूरे भारत में जहां कहीं भी मुसलमान बहुसंख्यक थे, वहां उन्होंने मनमानी की। हिन्दुओं की हत्याएं की, हिन्दू महिलाओं के साथ बलात्कार किए। केरल के मालाबार में सबसे भयंकर स्थिति थी। यहां करीब 20 हजार से अधिक हिन्दुओं की हत्या कर दी गई। इससे अधिक हिन्दुओं का जबरन धर्म-परिवर्तन कर मुसलमान बना दिया गया।


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विनायक दामोदर सावरकर ने इस घटना पर बाद में ‘मोपला’ नामक उपन्यास की रचना की।माना जाता है कि मुसलमानों द्वारा हिंसा की इस अभूतपूर्व घटना ने महात्मा गांधी पर गहरा असर डाला था।

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