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मन की शांति के लिए ज़रूर करें लद्दाख के इन खूबसूरत मठों की सैर

10:27 am 17 Mar, 2018

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धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले जम्मू-कश्मीर का बेहद खूबसूरत क्षेत्र है लद्दाख। पहाड़ों पर बसा यह खूबसूरत नगर पनी स्वच्छ और निर्मल वादियों के साथ ही मठ के लिए भी मशहूर है। लद्दाख में आपको जगह-जगह कई मठ नज़र आ जाएंगे, क्योंकि अधिकतर बौद्ध धर्म के अनुयायी हैं। चलिए आपको बताते हैं लद्दाख के कुछ मठों के बारे में ताकि कभी लद्दाख जाने पर आप इन मठों की सैर करना न भूलें।

स्पीतुक मठ

इस मठ का निर्माण 11वीं सदी में हुआ था। यह बौद्ध के साथ ही हिंदू और सिख धर्म के लोगों की भी आस्था का केंद्र है। इस मठ के ऊपर तारा देवी एक मंदिर भी है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान बुद्ध तारा देवी की पूजा किया करते थे। आपको बता दें कि दलाई लामा जब भी लद्दाख जाते हैं, तो इसी मठ में रहते हैं।

अलची मठ

ऐसा कहा जाता है कि 10वीं सदी में तिब्बत के राजा ने बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए हिमालय क्षेत्र में 21 विद्वानों को भेजा था, मगर वहां के ठंडे वातावरण में वे लोग नहीं रह पाए। 21 में से सिर्फ़ दो लोग ही जीवित बच पाए और उन्हीं दो में से एक ने इस मठ का निर्माण करवाया। इस मठ की दीवारों की कलाकृतियों पर उस समय के बौद्ध और हिंदू परंपराओं की झलक मिलती है। यहां बुद्ध की कई सुंदिर मूर्तियां हैं।

लामायुरु मठ

ज़िंदगी की भागदौड़ के दूर कुछ सुकून के पल बिताने के लिए आप इस मठ में जा सकते हैं। इस खूबसूरत मठ मे आकर आपको शांति का अनुभव होगा। यह मठ लद्दाख के सबसे पुराने मठों में से एक है। इस मठ की दीवारों पर सुंदर कलाकृतियां और पेंटिंग की गई हैं। ऐसी मान्यता है कि बुद्ध शाक्यमुनि के समय इस क्षेत्र में एक झील थी, जहां ढेर सारे नाग रहते थे।

बासगो मठ


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लद्दाख का बासगो क्षेत्र बहुत सुंदर हैं। इस हिस्से को 15वीं शताब्दी के बनाया गया था। यहां पुराने किले के अलावा खूबसूरत मठ भी हैं, जहां जाकर आपको मन की शांति मिलेगी।

हेमिस मठ

इस मठ को निर्माण वैसे तो वर्ष 1630  में हुआ था, लेकिन 1972 में राजा सेंज नामपार ने इसे फिर से बनवाया और मठ के साथ ही एक धार्मिक स्कूल भी बनाया गया। इस मठ में भग्वान बुद्ध की तांबे से बनी प्रतिमा रखी हुई है, जो लोगों को खासतौर पर आकर्षित करती है। इसके अलावा भी मठ के हर कोने में आपको बहुत ही आकर्षक चीज़ें देखने को मिलेगी।

wikimedia    

चेमेरी मठ

यह मठ 1664 में लामा तांगसांग रासेन ने बनवाया था और यह राजा सेंग नमग्याल को समर्पित है।

स्टोक मठ

इस मठ का निर्माण 14वीं शताब्दी के आसपास हुआ है। 1842 में जब डोगरा ने लद्दाख पर हमला किया था तब वहां के राजा नामग्याल महल छोड़कर स्टोक में आ गए थे और यहीं बस गए। राजा के वशंज अब भी यहां रहते हैं।

रिजोंग मठ

यह मठ 1831 में लामा त्सुल्तिम नीमा द्वारा बनवाया गया था। इस मठ को ध्यान करने वालों के लिए स्वर्ग माना जाता है। साथ ही यह मठ अपने सख्त नियम कायदों के लिए भी जाना जाता है। इस मठ से 2 किलोमीटर की दूरी पर महिलाओं के लिए बना मठ भी है।

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