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हिंदुओं के सबसे बडे़ धार्मिक आयोजन का 30 वर्षों से हिस्सा बन रहा है ये मुसलमान, आखिर क्यों?

Updated on 31 January, 2019 at 12:09 am By

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इलाहाबाद में आस्था के महाकुंभ का आगाज़ हो चुका है। प्रयागराज में संगम किनारे रेतीली ज़मीन पर बसने वाले अस्थाई कुंभ की चकाचौंध इन दिनों देखते ही बन रही है। 55 दिनों तक चलने वाले इस महापर्व के लिए देश और दुनिया से करोड़ो लोग पवित्र डुबकी लगाने के लिए एकजुट हो रहे हैं। पृथ्वी पर होने वाले इस सबसे बड़े धार्मिक आयोजन में नागा साधुओं और अखाड़ों से इतर कई बार कुछ अनोखे नज़ारे भी दिख जाते हैं। इन दिनों कुंभ में एक मुस्लिम शख्स एक ख़ास वजह से सुर्ख़ियों में है।

 

 


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धर्म के नाम पर आज जहां एक ओर लोगों को लड़ते झगड़ते हुए देखा जा रहा है तो वहींं इस देश में कुछ ऐसे लोग भी है जिनके लिए मानवता की सेवा करना पहला धर्म है। फिर चाहे वो किसी भी जाति या समुदाय से ताल्लुक क्यों न रखते हों।

हम बात कर रहे हैं मुज़फ़्फ़रनगर में इलेक्ट्रॉनिक की दुकान चलाने वाले 70 वर्षीय मोहम्मद महमूद की, जिन्होनें मानवता की मिसाल कायम की है। मोहम्मद कुंभ मेले मे मौजूद सभी साधु अखाड़ों के टेंट की लाइट की देख -रेख का काम करते हैं। आपको बता दे जूना अखाड़ा कुंभ का सबसे बड़ा अखाड़ा है, जिसमें  मोहम्मद बीते तीन दशकों से लाइट का काम देखते आ रहे हैं।

 

 



अब ज़रा आपको बताते हैं महमूद का कुंभ में आना कैसे हुआ। दरअसल, महमूद का कहना है करीब 33 वर्ष पहले उनकी मुलाकात एक नागा साधु से हुई थी, जिन्होनें उन्हें कुंभ मेले में आने का न्यौता दिया था। महमूद कहते हैं, ”मुझे साधुओं के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं थी, लेकिन बीते तीन दशकों से मैं यहां आ रहा हूं और अब काफ़ी कुछ जानता हूं। जब भी कुंभ नज़दीक होता है तो जूना अखाड़े के साधु मुझे यहां बुलाना नहीं भूलते”।

अखाड़ों के सभी साधु-संत महमूद को लाइट वाले मुल्ला कहकर सम्मान और आदर भाव की नजरों से देखते हैं। साथ ही उन्हें एक साधु भी  मानते हैं। मोहम्मद महमूद उन लोगों के लिए मिसाल हैं, जो धर्म के नाम पर हिंसा करते हैं।

 

 

यहां देखें इस खबर का वीडियो:

 

 


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गौर हो हर महाकुंभ में करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचते हैं। लेकिन इनमें कुछ ही लोग ऐसे हैं, जो सामप्रयादिक सौहार्द को बनाए रखने के लिए एक सार्थक पहल करते हैं। महमूद उन्हीं चंद लोगों में से हैं, जो अखाड़ों को रौशनी देकर धर्मनिरपेक्षता को परिभाषित कर रहे हैं।

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