उत्तर प्रदेश में मोदी सुनामी, ये रहे भाजपा की जीत के 4 बड़े कारण

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Updated on 11 Mar, 2017 at 1:37 pm

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उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर के विधानसभा चुनावों के वोटों की गिनती अब भी चल रही है। रुझानों से साफ जाहिर है कि उत्तर प्रदेश में 15 सालों के बाद भारतीय जनता पार्टी सत्ता में वापसी कर रही है। वहीं, उत्तराखंड में भी पार्टी को बहुमत मिल चुका है। मणिपुर में भाजपा को बढ़त मिली है। वहीं, पंजाब और गोवा में कांग्रेस पार्टी वापसी करती दिख रही है। पिछले साल नवंबर महीने में हुई नोटबंदी के बाद इन पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव केन्द्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और खासकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए महत्वपूर्ण बताए जा रहे थे। जहां तक उत्तर प्रदेश की बात है यह पिछले 32 साल में सबसे बड़ी जीत है। वर्ष 1991 में राम लहर के दौरान भी भाजपा को इतनी बड़ी जीत हासिल नहीं हुई थी। हम यहां उत्तर प्रदेश में भाजपा की जीत के 4 बड़े कारणों की चर्चा करने जा रहे हैं।

1. नोटबंदी का सफल होना

भाजपा की जीत में नोटबंदी का सफल होना एक बड़ा कारण है। आम मतदाताओं ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस बड़े फैसले को गंभीरता से लिया। नोटबंदी ने उत्तर प्रदेश चुनावों में निर्णायक भूमिका निभाई। कई राजनीतिक संगठन जो चुनावों में कालेधन का उपयोग करते रहे हैं, इन चुनावों में दिल खोल कर खर्च नहीं कर सके। नोटबंदी की माध्यम से केन्द्र ने मतादाताओं को संदेश दिया कि कड़े फैसले लेने का वक्त आ गया है।

2. प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई में लड़ना

उत्तर प्रदेश में भाजपा ने अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार नहीं घोषित किया था। यहां चुनाव पूरी तरह प्रधानमंत्री मोदी को केन्द्र में रखकर लड़ा गया था। भाजपा ने पीएम मोदी के विकास के एजेन्डे का भरपूर फायदा उठाया।



3. मुस्लिम तुष्टीकरण, जातिवादी राजनीति से किनारा

भारतीय जनता पार्टी ने टिकटार्थियों की अपनी पहली सूची जारी करते समय यह संदेश दे दिया था कि वह मुस्लिम तुष्टीकरण का तरीका नहीं अपनाने जा रही है। साथ ही पार्टी ने जातिवादी राजनीति को तवज्जो नहीं दी। विकास पर ध्यान दिया। यही वजह है कि देवबंद जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में भी भाजपा को जीत हासिल हुई है। वहीं, विरोधी राजनीतिक दल मुस्लिम तुष्टीकरण व जातिवादी राजनीति में उलझे रहे। इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा।

4. उत्तर प्रदेश की बदहाल स्थिति

उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी भले ही यह दावा करती रही हो कि काम बोलता है, लेकिन जमीनी स्तर पर लोग इससे नाराज रहे। उत्तर प्रदेश में लंबे समय से तथाकथित सेकुलर ताकतों के सत्ता में होने के बावजूद यहां न तो सही सड़कें हैं और न ही बिजली। देश का सबसे बड़ा प्रदेश मूलभूत सुविधाओं से महरूम है।


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