यूनिफॉर्म सिविल कोड पर मोदी सरकार ने मांगी लॉ कमीशन से रिपोर्ट

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Updated on 1 Jul, 2016 at 6:54 pm

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यूनिफॉर्म सिविल कोड पर नरेन्द्र मोदी की सरकार ने लॉ कमीशन से इसे लागू करने के लिए सभी पहलुओं पर गौर करने को कहा है।

आजादी के 68 साल में ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी केन्द्र सरकार ने लॉ कमीशन को ऐसा करने के लिए कहा है। कानून मंत्रालय ने इस संबंध में फैसलों से जुड़े सभी दस्तावेजों की भी मांग की है।

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क्या है यूनिफॉर्म सिविल कोड?

यूनिफॉर्म सिविल कोड को समान नागरिक संहिता कहा जाता है। इसका मतलब है कि देश में सभी नागरिकों के लिए एक जैसा कानून। संविधान के आर्टिकल 44 के मुताबिक, यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू करना राज्य का कर्तव्य है।

फिलहाल देश में हिन्दू, मुसलमान और अन्य धर्म के लोगों के अलग-अलग पर्सनल लॉ हैं। इसमें संपत्ति, शादी, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामले आते हैं। इस विषय पर पहले भी बहस होती रही है। भाजपा जनता पार्टी को इसके समर्थन में देखा जाता है, जबकि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा ही इसका विरोध किया है।


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यूनिफॉर्म सिविल कोड के लागू होने से देश में सभी नागरिकों के लिए एक सरीखा कानून होगा।

माना जाता है कि इसके लागू होने से देश की व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन देखने को मिलेगा। इसके बावजूद कुछ लोग, खास कर मुस्लिम समुदाय इसके विरोध में है।

मुस्लिम समुदाय का मानना है कि इसके लागू होने से देश में हिन्दू कानून लागू हो जाएगा, जो निश्चित रूप से सही नहीं है।

सच्चाई यह है कि यूनिफॉर्म सिविल कोड के लागू होने से देश में ऐसा कानून होगा जो हर धर्म के लोगों के लिए बराबर होगा। इसका धर्म से कोई लेना-देना नहीं होगा।

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