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मिजो, कुकी जनजातियों का इजराइल कनेक्शन

Published on 25 February, 2016 at 9:06 pm By

मिजो, कुकी और चीन जनजातियों का इजराइल कनेक्शन। आप यही सोच रहे होंगे, कि भारतीय गणराज्य के इन जनजातियों का संबंध इजराइल से कैसे हो गया। जी हां, मिजोरम और मणिपुर में रहने वाला मिजो, कुकी और चीन जनजातीय समूह इसका दावा करते है।

इन समूहों के मुताबिक वे इजराइल के 10 लुप्तप्राय हो चुके जनजातीय समूहों से हैं और उनका मूल इजराइल में ही है।


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मिजो, कुकी और चीन जनजातीय समूहों के सदस्य न केवल मिजोरम और मणिपुर में रहते हैं, बल्कि इनकी आबादी सीमावर्ती देश म्यांमार और बांग्लादेश तक फैली हुई है। बांग्लादेश के चटगांव में बेनी मिनासे समुदाय के लोग भी रहते हैं, जिनका दावा है कि उनका मूल भी इजराइल में ही है।

कुकी-मिजो-चीन का यहूदियों के साथ संबंध अब तक स्थापित तो नहीं हो सका है, लेकिन पिछले करीब आधी सदी से बेनी मिनासे समुदाय का इजराइल के साथ संंबंध की बात सही साबित होती रही है।

इस संबंध में अध्ययन और खोजबीन तो 1950 के दशक में ही शुरू हो गई थी, लेकिन व्यापक अध्ययन 1980 के बाद ही किया जा सका था।

माना जाता है कि प्राचीन इजराइल दो राज्यों में बंटा हुआ था। अधिकतर यहूदियों के बारे में मान्यता है कि वे दक्षिणी राज्य से संबंध रखते थे, जबकि 10 ऐसे जनजातियों का जिक्र किया जाता है, जो उत्तरी इजराइल में बहुसंख्यक थे।

721 ईसा पूर्व असीरियाइयों ने इजराइल के उत्तरी भाग पर हमला कर दिया और यहां रह रहे जनजातियों को देशनिकाला दे दिया। बेनी मिनासे समुदाय के बारे में कहा जाता है कि यह समूह कभी उत्तरी इजराइल में जीवन-यापन करता था। हालांकि, इतिहास में इसका कोई लिखित उल्लेख या प्रमाण नहीं है।



मौखिक इतिहास के मुताबिक, बेनी मिनासे समुदाय देशनिकाला की इस घटना के बाद पर्सिया होते हुए अफगानिस्तान आ गया। हिन्दुकुश पर्वतमाला को पार कर यह समुदाय तिब्बत तक पहुंच गया। इस समूह के लोगों का कुछ हिस्सा तिब्बत की सीमा से होते हुए चीन की तरफ चला गया। वे गुफाओं में रहना पसन्द करते थे, इसलिए उनका नाम पड़ा शिनलुंग।

बाद में यह समूह मिजोरम, म्यांमार और बांग्लादेश के कई हिस्सों में फैल गया।

हाल के दिनों में जब कुकी, मिजो और चीन जनजातियों को बेनी मिनासे समूह के बारे में पता चला तो हजारों लोगों ने यहूदी धर्म के प्रति अपनी आस्था शुरू कर दी। इन लोगों ने अपने पूजा स्थल बना लिए। इनके अधिकतर अराधनालय नए हैं और वे वर्ष 1990 से लेकर वर्ष 2000 के बीच बने हैं। ये लोग मानते हैं कि इनके लोकगीतों, नृत्य शैली, आचार व्यवहार और खान-पान में इजराइली होने की झलक मिलती है।

मिजोरम और मणिपुर लम्बे समय से उग्रवाद से प्रभावित रहे हैं। अधिकतर कुकी, मिजो और चीन युवाओं का मानना है कि इतिहास की वजह से इजराइल में उनका स्वागत किया जाएगा।

गौरतलब है कि इजराइल के वापसी कानून की वजह से बहुत से ऐसे लोगों को इस देश में जगह मिली है, जो यहूदी धर्म अपना चुके हैं। वर्ष 2006 में बेनी मिनासे समुदाय के 1700 लोगों को इजराइल की सरकार ने पश्चिमी तट और गाजा स्ट्रिप में बसाया है।


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हालांकि, इसका एक दूसरा पहलू भी है। मिजोरम और मणिपुर ईसाई बहुल राज्य रहे हैं। 17वीं और 18वीं सदी में ईसाइयत ने यहां अपना पंख फैलाना शुरू किया था।

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