इस शख्स ने बनाया बिना बिजली से चलने वाला फ्रिज, आर्थिक तंगी की वजह से छोड़ी थी पढ़ाई

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Updated on 12 Apr, 2017 at 4:12 pm

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कभी बचपन से ही मिट्टी से खलने वाले और मिट्टी की ही कारीगरी करने वाले मनसुखभाई प्रजापति ने वो कर दिखाया है जो आज के दौर में कईयों के लिए मिसाल है।

मनसुखभाई का मिट्टी के बर्तन बनाने का पारंपरिक व्यवसाय था। लेकिन उन्हें इस व्यवसाय के अस्तित्व को लेकर डर था, क्योंकि इसका कारोबार दिन-ब-दिन गिर रहा था। वह अपने इस पुश्तैनी कारोबार को जिन्दा रखना चाहते थे। ऐसे में उन्होंने आज के वक्त की जरूरत को परखते हुए कुछ नया करने की सोची।

उन्होंने बिजनेस के आधुनिक माइंडसेट को बारीकी से समझा और मिट्टी की खुशबू बरकरार रखने के लिए ‘मिट्टीकूल’ नाम की कंपनी बनाई। यह कंपनी मिट्टी के फ्रिज, कुकर और वाटर फिल्टर बनाती है। उन्होंने बिना बिजली से चलने वाला फ्रिज बनाया है, जो खासतौर पर दूर दराज रहने वाले लोगों के लिए बेहद उपयोगी है। इस फ्रिज की कीमत लगभग 3000 के आस-पास है।

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इस कंपनी ने उनके पुश्तैनी कारोबार को जिन्दा रखने के लक्ष्य को एक नई दिशा प्रदान की।

 


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मनसुखभाई प्रजापति कहते हैं कि वह बचपन से ही मिट्टी के बर्तन देखते आए हैं। समय के बदलाव के साथ मिट्टी के बर्तनों की डिमांड कम हो गई। उन्होंने कहा-

“मैं हमेशा सोचता कि इस पुश्तैनी कारोबार को कैसे बरकरार रखा जाए। फिर हमने तय किया कि कारोबार को समय के अनुसार परिवर्तित करना होगा। मिट्टी के बर्तन बनाने वाले परिवार की पहले बहुत पूछ होती थी। घर में कोई भी आयोजन हो, लोग हमारे घर की ओर दौड़े चले आते थे, लेकिन बाजारवाद की वजह से अपनी साख पर बट्टा लगता नजर आ रहा था, इसलिए मैंने तय किया कि अपना पुश्तैनी कारोबार भी जिंदा रखूंगा और मिट्टी की खुशबू भी, बस उसमें थोड़ा परिवर्तन करने की सोची। यानी इस कारोबार को आधुनिक रंग में रंगने की कोशिश शुरू की। साइंटिफिक तरीके से मिट्टी की नई-नई चीजें विकसित की। इसके बाद तो यह कारोबार फर्राटे मारने लगा।”

अब ‘मिट्टीकूल’ कंपनी के उत्पादों की भारत में ही नहीं बल्कि दुबई, जापान और अमेरिका में भी मांग है।

अपने पारंपरिक पेशे को नई बुलंदियों पर पहुंचाने वाले मनसुखभाई को अंतरराष्ट्रीय मैगजीन फोर्ब्स ने ग्रामीण भारत के शक्तिशाली लोगों की सूची में शामिल किया हुआ है। वहीं, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. अब्दुल कलाम ने भी उन्हें ‘ग्रामीण भारत का सच्चा वैज्ञानिक’ की उपाधि से सम्मानित किया था।

कभी दसवीं कक्षा में फेल हुए मनसुखभाई ने एक वक्त ऐसा भी देखा हुआ है, जब उन्हें अपने परिवार का पालन-पोषण करने के लिए पढ़ाई बीच में ही छोड़ चाय बेची।

यकीनन जिस तरह से मनसुखभाई ने अपने पुश्तैनी कारोबार को जिन्दा रखने के लिए आज की आधुनिक सोच के साथ हाथ मिलाया, वो उनके बेहतरीन बिजनेस स्किल को तो दर्शाता ही है, साथ ही कई लोगों के सामने एक मिसाल भी कायम करता है।

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