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बहु-विवाह के लिए कुरान का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं मुस्लिमः गुजरात उच्च न्यायालय

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Updated: 1:09 pm 15 Oct, 2015

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गुजरात उच्च न्यायालय ने कड़े शब्दों में कहा है कि मुसलमान बहु-विवाह या एक से अधिक पत्नी रखने के लिए कुरान का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। कोर्ट ने कहा है कि ऐसा महज स्वार्थपूर्ति के उद्देश्य से किया जा रहा है। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा है कि अब देश में समान नागरिक कानून अपनाने का वक्त आ गया है, ताकि इस तरह के प्रावधानों से संविधान के उल्लंघन को रोका जा सके।

आईपीसी के सेक्शन 494 के तहत जस्टिस जेबी परदीवाला ने एक से अधिक पत्नी रखने के मामले में यह टिप्पणी की। दरअसल, इस सेक्शन के तहत बहु-विवाह के मामले में सजा का प्रावधान है।


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पिछले दिनों जफर अब्बास मर्चेन्ट नामक एक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी कि उसके खिलाफ पत्नी द्वारा दायर की गई याचिका को रद्द कर दिया जाए। पत्नी का आरोप था कि अब्बास ने बिना उसकी अनुमति के दूसरी शादी कर ली है। अपनी याचिका में अब्बास ने दावा किया था कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड चार शादियों की इजाजत देता है। ऐसे में उसकी पत्नी द्वारा आईपीसी के सेक्शन 494 के तहत की गई एफआईआर का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

गुरूवार को इस पर फैसला देते हुए जस्टिस परदीवाला ने कहा कि जब कुरान में बहु-विवाह की बात कही गई थी, तब इसके बाजिव कारण थे। लेकिन आज सिर्फ स्वार्थवश एक से अधिक पत्नी रखने के लिए मुस्लिम पुरुष कुरान की गलत ब्याख्या कर रहे हैं।

यही नहीं, उन्होंने कहा कि आधुनिक और प्रगतिशील भारत में इस तरह के सोच की कोई जगह नहीं होनी चाहिए। यह सरकार का दायित्व बनता है कि वह समान नागरिक कानून के बारे में सोचे और इसे लागू करे। कोर्ट ने आगे कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के तहत चार पत्नियों को रखना भारतीय संविधान का उल्लंघन है।

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