कैंसर के इलाज में अब न तो होगा रेडिएशन का खतरा और न ही होगा दर्द!

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Updated on 15 Dec, 2016 at 5:15 pm

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अमेरिकी शोधकर्ताओं ने एक ऐसी चिकित्सक विधि का ईजाद किया है जिससे खतरनाक कैंसर सेल्स को महज दो घंटे में खत्म करने का दावा किया जा रहा है। अगर यह विधि परीक्षण से सफलतापूर्वक गुजर जाती है, तो इसके जरिए बच्चों की वो सर्जरी जिसमें ट्यूमर तक पहुंच पाना काफ़ी मुश्किल होता है, के ठीक होने की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स की अगर मानें तो शोधकर्ताओं की एक टीम ने एक प्रायोगिक तरीके के अंतर्गत कैंसर की कोशिकाओं को 95 फीसदी तक नष्ट करने में सफलता अर्जित की है। ख़ासकर उन ट्यूमर को भी खत्म किया गया है, जहां तक पहुंच पाना मुश्किल होता है।

सेन एंटोनियो के टैक्सास विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर मैथ्यू डोविन ने इस नए पेंटेट किए गए विधि को विकसित किया है, जिससे कैंसर कोशिकाओं को प्रभावी ढंग से नष्ट किया जा सकता है। नए तरीके के तहत नाइट्रोबेंडाडेहाइडे नाम के रसायनिक यौगिक को ट्यूमर के अंदर डाला जाता है, जो कोशिकाओं पर अपना असर डालती है।

रसायनिक यौगिक को ट्यूमर के अंदर डाले जाने के बाद उन कोशिकाओं पर तेज रोशनी डाली जाती है, जिस कारण कोशिकाएं अंदर से काफी अम्लीय बन जाती हैं और वास्तव में अपने आप को नष्ट कर लेती हैं।

यह शोध ‘द जर्नल ऑफ क्लिनिकल ओंकोलॉजी’ में प्रकाशित किया गया है। डोबिन का अनुमान है कि इस तरीके से कैंसरग्रस्त 95 फीसदी कोशिकाएं दो घंटे के अंदर नष्ट हो जाती हैं। प्रोफेसर मैथ्यू डोविन का कहना हैः


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“हालांकि कई तरह के कैंसर होते हैं, लेकिन उन सबमें एक चीज समान है कि इस इलाज से सभी तरह की कैंसर की कोशिकाएं आत्महत्या के लिए प्रेरित होती हैं। मैने इस तरीके को तीन गुणा नकारात्मक स्तन कैंसर पर आजमाया है, जो सबसे आक्रमक कैंसर में से एक माना जाता है और जिसका इलाज सबसे कठिन है।”

शोधकर्ताओं ने इस विधि का पहला प्रयोग कुछ चूहों के ट्रीटमेंट पर किया था, जहां आश्चर्यजनक परिणाम मिले। इस प्रयोग के बाद पाया गया कि इस तरीके से ट्यूमर को बढ़ने से रोका जा सकता है और उसके जिंदा रहने की संभावना भी दोगुनी हो जाती है।

डोबिन को उम्मीद है कि कई किस्म के कैंसर में यह तरीका कारगर होगा, जिसमें ऐसी जगह पर ट्यूमर होता है, जिसका इलाज करना शल्यचिकित्सकों के लिए काफी मुश्किल होता है, जैसे दिमाग की कोशिकाएं, महाधमनी या रीढ़ की हड्डी आदि।

इस विधि की सबसे ख़ास बात यह है कि इस तरीके से इलाज करने में न तो रेडिएशन का खतरा है और न ही दर्द होता है जो कि बच्चों के इलाज़ में काफ़ी कारगर साबित होगा।

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