मजहब की दीवार गिराते हुए हिन्दू-मुस्लिम युवकों ने एक-दूसरे की पत्नियों को दान दी किडनी

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Updated on 18 Oct, 2016 at 5:42 pm

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जहां समाज के कुछ लोग धर्म के नाम पर एक दूसरे को तोड़ने की बात करते हैं, वहीं दो युवकों ने इस मजहब की दीवार को दरकिनार कर मिसाल कायम की है कि धर्म इंसान को तोड़ता नहीं, बल्कि जोड़ता है।

जयपुर के रहने वाले हिन्दू और मुस्लिम दो युवकों की पत्नियों को किडनी से सम्बंधित बिमारी थी। डॉक्टर ने तस्लीम और अनीता नाम की इन महिलाओं  के पतियों को किडनी बदलवाने की सलाह दी थी।

अनीता और तस्लीम के पति हर संभव कोशिश में लगे हुए थे कि कहीं से कोई किडनी देने वाला मिल जाए, और जो किडनी देने के लिए राजी होता था, उससे किडनी मैच नहीं हो पाती।


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ऐसे में ये दोनों परिवार एक दूसरे के मददगार साबित हुए। डॉक्टरों की जांच में इन महिलाओं के पतियों की किडनियां एक दूसरे की पत्नियों के काम आईं।

अनिता के पति विनोद मेहरा और तसलीम के पति अनवर बताते हैं कि डॉक्टरों ने जैसे ही किडनी ट्रांसप्लांटेशन की सफल संभावना बताई तो इन दोनो ही परिवारों ने बिना किसी संकोच के किडनी दान पर काम करना शुरू कर दिया।

सफल ऑपरेशन कर विनोद की किडनी तसलीम में और अनवर की किडनी अनिता को ट्रांसप्लांट कर दी गई है।

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