पारंपरिक परिधान की वजह से पूर्वोत्तर की महिला को दिल्ली गोल्फ क्लब से भगाया !

Updated on 27 Jun, 2017 at 2:44 pm

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आम तौर पर पूर्वोत्तर के लोगों के साथ शेष भारत में भेदभाव की खबरें आती रहती हैं। इसलिए हम जिस खबर के बारे में आपको बताने जा रहे हैं, उससे आपको हैरत तो नहीं होगी, हालांकि यह शर्मनाक जरूर है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली गोल्फ क्लब में मेघालय की एक महिला को उनके पारंपरिक खासी परिधान में होने की वजह से बाहर जाने को कह दिया गया। हालांकि, इस मामले के तूल पकड़ने पर दिल्ली गोल्फ क्लब ने माफी मांग ली है।

टेलिन लिंगदोह नाम की यह महिला असम सरकार में स्वास्थ्य सलाहकार डॉक्टर निवेदिता के बेटे की देखभाल करती हैं। लिंगदोह भी उन 8 मेहमानों में शामिल थीं, जिन्हें क्लब के लंबे समय से सदस्य रहे पी. तिमैया ने आमंत्रण दिया था। लिंगदोह जैन्सम पहन कर क्लब पहुंची थीं। इस वजह से अधिकारियों ने उन्हें रोक दिया।

इस मामले पर डॉ. निवेदिता का कहना हैः


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“हमारे वहाँ पहुचने के 10-15 मिनट बाद क्लब के मेनेजर अजीत पाल, सुमिता ठाकुर नाम कि एक महिला के साथ आए और टेलिन को कमरे से बाहर जाने को कहा। जब मैंने उनसे इसका कारण पूछा तो उन्होंने जवाब दिया की वो एक नौकरानी (मेड) की तरह लग रही है। मैंने उनसे पूछा की आप कैसे इस निष्कर्ष पर पहुँचे? तो उन्होंने कहा कि वो अलग दिखती है, उसके कपड़े नौकरों जैसे हैं और वो नेपाली लग रही है। यह काफी अपमानजनक था और मैं ऐसे भेदभाव को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थी।”

बाद में टेलिन ने टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में बताया कि वो लन्दन और युएई जैसी जगह पर भी जैन्सेम पोशाक पहन कर जा चुकी हैं पर लेकिन कभी भी किसी भी तरह परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा था। उन्होंने कहा “लन्दन और अबू धाबी में लोग जैन्सेम की सराहना करते थे, लेकिन भारत में मुझे अपमान झेलना पड़ा, मुझे दिल्ली गोल्फ क्लब छोड़ कर जाने को कहा गया, क्योंकि वे हमारी संस्कृति या परंपरा को नहीं जानते थे।”

असम राज्य के एक फिल्मकार और फिल्म क्रिटिक उत्पल बोर्पुजारी ने कहाः

“जब तक लोगों की मानसिकता नहीं बदलेगी ऐसे घटनाएँ होती रहेंगी। और ऐसा तभी संभव है जब सरकार ठोस कदम उठाते हुए पूर्वोत्तर क्षेत्र को शैक्षिक पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाएगी। अफसोस की बात है कि  बीज़बारुआ समिति की रिपोर्ट, जिसने पूर्वोत्तर क्षेत्र के लोगों से संबंधित विभिन्न मुद्दों के संबंध में कई महत्वपूर्ण उपाय सुझाए थे, को अभी तक लागू नहीं किया गया है। साथ ही इन क्लबों को भी अपने व्यव्हार में बदलाव की ज़रुरत है।”

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