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लश्कर आतंकी आदिल को लेकर ‘हिन्दू आतंकवादी’ शब्द का इस्तेमाल क्यों कर रहा है मीडिया ?

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12:47 pm 11 Jul, 2017

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इन दिनों मेन स्ट्रीम मीडिया में ‘संदीप शर्मा’ नामक एक आतंकवादी की चर्चा खूब हो रही है। कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर से ताल्लुक रखने वाला यह व्यक्ति दरअसल आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का सक्रिय सदस्य है। उसने दक्षिण कश्मीर में एक थाना प्रभारी और पांच पुलिसकर्मियों की हत्या समेत कई एटीएम लूट की वारदात कबूली है।

हालांकि, मीडिया इस बात की चर्चा नहीं कर रहा है कि संदीप शर्मा ने सालों पहले इस्लामिक आतंकियों के साथ आकर इस्लाम अपना लिया था और अपना नाम बदलकर आदिल रख लिया। वह न केवल कट्टर इस्लामिक आतंकवादी है, बल्कि पांच वक्त का नमाजी भी।


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अपनी जांच में पुलिस को पता चला है कि संदीप वर्ष 2012 में कश्मीर घाटी आया था और उसने एक वेल्डर के तौर पर काम करना शुरू किया। इसी क्रम में वह कुलगाम में रहने वा्ले शाहिद अहमद के संपर्क में आया और धीरे-धीरे इस्लाम के प्रति उसका झुकाव बढ़ने लगा। वह इस्लाम से पूरी तरह प्रभावित हो गया। उसका परिचय लश्कर के कट्टर आतंकवादी शकूर अहमद के साथ हुई और वह आतंकी गतिविधियों में लिप्त रहने लगा। इस तरह वह एक कट्टर जिहादी बन गया।

आमतौर पर ‘आतंकवाद का कोई मजहब नहीं होता’ का गीत गाने वाला मीडिया संदीप शर्मा उर्फ आदिल को लेकर ‘हिन्दू आतंकवादी’ शब्द का बेशर्मी से इस्तेमाल कर रहा है।

इस प्रोपेगैन्डा को तब शुरू किया गया था जब कांग्रेस पार्टी केन्द्र में सत्ता में थी और येन-केन-प्रकारेण यह साबित करने पर तुली हुई थी हिन्दू आतंकवाद वस्तुतः मौजूद है। महाराष्ट्र के मालेगांव में हुए बम धमाके के बाद इस शब्द का उपयोग तथाकथित सेक्युलर मीडिया में धड़ल्ले से किया गया। हालांकि, यह कवायद प्रोपेगैन्डा ही साबित हुआ है, साथ ही इस्लामिक आतंकवाद को वैधता प्रदान करने की नाकाम कोशिश।

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