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मायावती सरकार ने मानी थी SC-ST एक्ट के दुरुपयोग की बात, दिए थे सुप्रीम कोर्ट सरीखे आदेश

Published on 4 April, 2018 at 12:42 pm By

SC-ST एक्ट के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद देशभर में  दलितों ने जमकर हंगामा किया। आगजनी, मारपीट, खूनी झड़प की घटनाओं में कम से कम 10 लोगों की मौत हुई है और हजारों की संख्या में लोग घायल हुए हैं।


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यह है मामला

 

एक याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने माना कि SC-ST एक्ट का देश में जमकर दुरुपयोग हो रहा है। लोगों को झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है। यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस एक्ट में मौजूद तत्काल गिरफ्तारी के प्रावधान पर रोक ला दी।

 


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इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक गलियारों में सियासत शुरू हो गई है।

 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ बहुजन समाज पार्टी खुलकर सामने आई है। इस पार्टी की सुप्रीमो मायावती जो खुद को दलितों का मसीहा कहती हैं ने आरोप लगाया है कि केन्द्र सरकार दलित विरोधी है और केन्द्र ने जानबूझकर कोर्ट में दलितों के पक्ष को मजबूती से नहीं रखा है। देशव्यापी प्रदर्शनों को मायावती का समर्थन प्राप्त है।

 

हालांकि, सोशल मीडिया के इस दौर में मायावती के ‘दलितों की मसीहा’ होने का नकाब खुलता दिख रहा है।

 



 

टाइम्स ऑफ इंडिया की इस रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2007 में अपने मुख्यमंत्रित्व काल में मायावती ने SC-ST एक्ट के दुरुपयोग को लेकर एक बड़ा फैसला किया था। मायावती सरकार ने आदेश दिया था कि इस एक्ट का दुरुपयोग करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। इसके साथ ही तुरंत गिरफ्तारी वाले प्रावधान पर भी रोक लगा दी गई। आपको शायद नहीं पता होगा कि उत्तर प्रदेश में दलितों को लेकर अलग कानून है। कानून में यह संशोधन मायावती की सरकार का निर्णय था।

 

तात्कालीन मायावती सरकार ने दो आदेश जारी किए थे जो अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के दुरुपयोग को रोकने के लिए थे। ये आदेश इस बात पर केंद्रित थे कि ऐक्ट के तहत केवल शिकायत के आधार पर कार्रवाई न हो, बल्कि प्राथमिक जांच में आरोपी के प्रथम दृष्ट्या दोषी पाए जाने पर ही गिरफ्तारी हो।

 

इन आदेशों की प्रतिलिपि सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

 

 

आदेश की इन प्रतिलिपियों पर तात्कालीन मुख्य सचिव प्रशान्त कुमार मिश्र के हस्ताक्षर हैं।

 

मायावती सरकार द्वारा किया गया यह संशोधन आज भी उत्तर प्रदेश में लागू है। इसके तहत SC-ST एक्ट में तुरंत गिरफ्तारी नहीं होती बल्कि जांच होती है। उत्तर प्रदेश में इस एक्ट के तहत अगर किसी को फंसाया जाता है, तो फंसाने वाले पर कार्रवाई की जाती है। सवाल यह है कि जब यह उत्तर प्रदेश में लागू है तब राजनीतिक दल देश की कीमत पर अपनी रोटियां क्यों सेंक रहे हैं? जब यह उत्तर प्रदेश में लागू है तब पूरे देश में क्यों लागू नहीं हो सकता?

 

सवाल यह भी उठता है कि जब बसपा सुप्रीमो मायावती खुद SC-ST एक्ट के दुरुपयोग होने की बात मानती रही हैं, तब उन्हें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ऐतराज क्यों है?

वहरहाल, इस सवाल का जवाब मायावती व उनके सिपहसालार ही दे सकते हैं।

 


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