मानव-तस्करी के लिए कुख्यात हो रहा है पश्चिम बंगाल, भारत के दूसरे राज्य भी कुछ कम नहीं

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Updated on 1 Apr, 2017 at 2:45 pm

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हाल के दिनों में भारत में मानव-तस्करी के मामले बढ़ गए हैं। इस रिपोर्ट में वर्ष 2016 के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया है कि मानव-तस्करी के सबसे अधिक मामले पश्चिम बंगाल से आए, वहीं राजस्थान इस मामले में दूसरे नंबर पर रहा। हम यहां पड़ताल करने की कोशिश कर रहे हैं कि भारत के किन राज्यों में मानव-तस्करी के मामले सबसे अधिक देखे गए हैं।

पश्चिम बंगाल

पिछले साल पूरे देश भर में दर्ज 8,132 शिकायतों में से 3,576 शिकायतें पश्चिम बंगाल से मिली हैं।

राजस्थान

इस सूची में राजस्थान दूसरे नंबर पर रहा। यहां से 1,422 शिकायतें मिली हैं। पश्चिम बंगाल और राजस्थान में मानव-तस्करी के कुल मामलों का 60 फीसदी से अधिक दर्ज किया गया।


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गुजरात

548 मामलों के साथ गुजरात तीसरे नंबर पर रहा है।

महाराष्ट्र

वहीं, महाराष्ट्र में मानव तस्करी के कुल 517 मामले सामने आए।



केंद्र शासित प्रदेश

केंद्र शासित (यूटी) प्रदेशों में दिल्ली मानव तस्करी की शिकायतों के मामले में सबसे ऊपर है। 75 मामलों में से 66 केवल दिल्ली में थे।

दक्षिण के राज्य

दक्षिण भारतीय राज्यों में सबसे बुरा हाल तमिलनाडु का रहा। वहां 2016 में मानव तस्करी के 434 मामले दर्ज हुए। इसके बाद कर्नाटक में 404 मामले सामने आए। दक्षिण के ही अन्य राज्य आंध्र प्रदेश और तेलांगना की हालत भी कुछ ठीक नहीं है। आंध्र में 239 और तेलांगना में 229 मामलों के साथ हालात जैसे ही रहे। जबकि केरल में 21 शिकायतें दर्ज की गईं थीं।

पूर्वोत्तर

जहां तक पूर्वोत्तर की बात तो असम में वर्ष 2016 में मानव-तस्करी के कुल 91 मामले देखने को मिले। पूर्वोत्तर के राज्यों की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकारों ने मानव तस्करी को रोकने के लिए खास दस्ते बनाए हैं।

मानव तस्करी के मामले इन राज्यों में कुछ इस तरह दर्ज किए गए हैं। झारखंड में 109, उड़ीसा में 84 और बिहार में 43 मानव तस्करी के मामले सामने आए। जबकि, उत्तर प्रदेश में 79 और मध्य प्रदेश में 51 मामले दर्ज किए गए हैं।


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