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मंगल पांडेय ने नहीं, बल्कि इन्होंने रखी थी देश में स्वतंत्रता संग्राम की नींव

Published on 24 January, 2019 at 7:35 pm By

आज से 72 साल पहले भारत में ब्रिटिश शासनकाल था। हमारा देश अंग्रेज़ों का गुलाम था। देश को गुलामी की इस ज़ंजीर से आज़ादी दिलाने के लिए बहुत सारे वीर सपूतों ने अपने प्राणों की आहुति दी। कई लोगों ने भारत को स्वतंत्रता दिलाने में बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। इन लोगों में कई नाम आते हैं जैसे भगत सिंग, राजगुरू, सुखदेव, चंद्रशेखर आज़ाद, मंगल पांडेय, नेताजी सुभाष चंद्र बोस आदि। लेकिन अक्सर सवाल ये खड़ा होता है आखिर भारत को आज़ाद कराने के लिए सबसे पहले क्रांति की शुरुआत किसने की थी?


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हमेशा से हम सुनते आए हैं भारत को आज़ाद कराने के लिए सबसे पहले अंग्रेज़ों का विरोध मंगल पांडेय ने किया था। इसे लेकर बॉलीवुड में कई मूवीज़ भी बनी हैं। लेकिन मंगल पांडेय से भी पहले एक क्रांतिकारी ऐसे थे, जिन्होंने इस क्रांति का आगाज़ किया था। मंगल पांडेय ने उनकी इस क्रांति की चिंगारी को आग में तब्दील किया था। वो नाम है मातादीन भंगी। इनके बारे में कम ही लोगों ने सुना होगा। चलिए हम आपको आज बताते हैं इनके बारे में।

 

 

मातादीन ने रखी आज़ादी की नींव

कहा जाता है  कोई भी क्रांति हो, आज़ादी की लड़ाई हो, देश की रक्षा की बात हो, दलित हर जगह बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं। देस को आज़ादी दिलाने में भी दलितों का बहुत बड़ा हाथ है। मातादीन अधिकारी भी दलित नेता ही थे। उन्होंने ही देश को आज़ाद कराने की नींव रखी थी।



 

मंगल पांडेय को सामने देख बौखला गए थे मातादीन

मार्च 1857 में कोलकाता से महज़ 16 किलोमीटर की दूरी पर बैरकपुर छावनी थी। छावनी में एक प्यासा मज़दूर आया। ये मज़दूर था मातादीन भंगी। मातादीन प्यास से तड़प रहा था। उसी समय उसने मंगल पांडेय से पानी पिलाने की गुहार लगाई। मंगल पांडेय उच्च जाति से ताल्लुक रखते थे, उन्होंने उसे पानी पिलाने से इंकार कर दिया।

 

 

इस पर बौखलाहट में मातादीन भंगी कह पड़े, “कैसा है तुम्हारा धर्म जो एक प्यासे को पानी पिलाने की इजाज़त नहीं देता और गाय जिसे तुम लोग मां मानते हो, सूअर जिससे मुसलमान नफ़रत करते हैं, लेकिन उसी के चमड़े से बने कारतूस को मुंह से खेलते हो।” मंगल पांडेय को मातादीन भंगी की बात ये छू गई और फिर उन्होंने उसे पानी पिलाया।

 

 


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मातादीन से हुई बातचीत को मंगल पांडेय ने बैरक के सभी लोगों को बताया। ये सब जानकर सभी तिलमिला उठे। बस यहीं से हो गई थी क्रांति की शुरुआत। इस चिंगारी ने ज्वाला का रूप ले लिया। इसके बाद मई 1857 को मेरठ की छावनी में सैनिकों ने बगावत कर दी। इसके बाद क्रांति की ये ज्वाला पूरे देश में जल उठी। अंग्रेज़ों ने भी जो चार्जशीट बनाई थी उसमें पहला नाम मातादीन भंगी का ही था।

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