साथी की शहादत से दुःखी बिहार के IPS ने फेसबुक पर लिखा दिल को झकझोर देने वाला पोस्ट

author image
Updated on 12 Aug, 2016 at 9:47 pm

Advertisement

बिहार के लखीसराय-मुंगेर जिले की सीमा पर मंगलवार को हुई पुलिस-नक्सली मुठभेड़ की घटना में एक जवान की शहादत के बाद बिहार के एक IPS अधिकारी का दर्द छलक कर सामने आया है।

एसटीएफ के एसपी शिवदीप लांडे ने इस शहादत को लेकर अपने फेसबुक पेज पर एक मार्मिक पोस्ट लिखी है, जिसे पढ़ कर आपकी आंखें जरूर भर आएंगी।

आपको बता दें कि नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुए जवान का नाम अजय मंडल था, जो बिहार पुलिस के एसटीएफ यानी स्पेशल टास्क फोर्स से जुड़े थे। अजय की शहादत पर राज्य के तेजतर्रार आईपीएस अफसरों में शुमार और वर्तमान में एसटीएफ एसपी का पद संभाल रहे शिवदीप लांडे ने फ़ेसबुक पोस्ट के ज़रिए लिखा कि कुछ दिनों बाद इस शहदात को भी लोग भूल जाएंगे।

फेसबुक पर अपनी पोस्ट के साथ शिवदीप ने शहीद के शव से लिपट कर बिलखती उसकी विधवा का फोटो भी डाला है।


Advertisement

शिवदीप लांडे ने अपने फेसबुक वॉल पर लिखा कि ऐसा नहीं कि यह पहली बार हुआ है। निरंतर ये होता रहा है या यह कहूं कि लगभग रोजाना ही होता है। बस आप और हम इस सत्य से अनभिज्ञ रह जाते हैं। मुझे कभी-कभी लगता है कि हम न जाने सदैव कितने मुद्दों पर बात और बहस करने को उतारू रहते हैं, पर शायद ही कभी किसी शहीद को लेकर बात करते होंगे। सिनेमा के पर्दों के हीरो को देख उनके साथ एक तस्वीर लेने को मर मिटते हैं, पर जो जवान हमारी और आपकी जिन्दगी की खुशी के लिए खुद को मिटा देते, उसके बारे में कोई चर्चा नहीं।

उसको अपने सामने देख दिल किया की मैं भी खुल के बोल सकूं कि तुम कितने खास थे।

आज मैंने अपने परिवार का एक जवान खो दिया। अजय लाल मंडल ने कल रात लखीसराय में नक्सलियों से लड़ते-लड़ते खुद की जान गवां दी पर उनको आगे बढ़ने से रोक लिया। तत्काल मैं खुद उसको देखने मुंगेर गया। उसको अपने सामने देख दिल किया की मैं भी खुल के बोल सकूं कि तुम कितने खास थे, तुम कितने अनमोल थे पर अपने सभी भावनाओं को खुद के अंदर रख लिया। मेरे सामने उसकी पत्नी फूट-फूट कर रो रही थी, कभी खड़ी होती तो कभी बेहोश। मैं कैसे समझाता उसको कि तुम्हारा पति कितना महान था, अफसोस की शायद उसको कुछ दिनों बाद ये बताने वाला कोई न हो, क्योंकि सब भूल जाएंगे इस शहीद को भी बाकियों की तरह।

मैं यह आप लोगों के साथ इस लिए शेयर कर रहा हूं, क्योंकि अब यह समय है, खुद से पूछने का कि क्या हम सच में इन शहीद हुए जवानों के आहुति को साकार कर रहे हैं ? हम तो सरहद और जंगलों में दुश्मन से लड़ते-लड़ते मर जाते हैं, पर क्या आप अपने अंदर के बुराइयों को मारेंगे, ताकि हम एक नवनिर्माण समाज बना सकें। आशा करता हूं कि जो मित्र यह पोस्ट पढ़ रहे हैं वे इन शहीदों को स्मरण कर राष्ट्र निर्माण में बराबर से भाग लें। जय हिंद।

Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement