देशद्रोह के नारे, आरक्षण की आग; दूसरी तरफ देश की हिफाजत के लिए शहीद हुआ JNU से पढ़ा यह जाट

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6:00 pm 22 Feb, 2016

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यूनान-ओ- मिस्र-ओ- रोमा, सब मिट गए जहां से
अब तक मगर है बाकी, नाम-ओ-निशां हमारा।
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन, दौर-ए-जहां हमारा।

हमारे देश की विडम्बना तो देखिए, जहां एक तरफ आरक्षण के लिए जाट समुदाय हिंसा पर उतारू हो गया है, वहीं उसी समुदाय से ताल्लुक रखने वाले पवन ने अपनी परवाह किए बिना देश की हिफाजत के लिए जान दे दी।

यही नहीं, पवन ने अपनी पढ़ाई उसी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में पूरी की थी, जहां के कुछ छात्रों पर देशविरोधी नारे लगाने के आरोप लगे हैं। इसी JNU में देश के टुकड़े-टुकड़े करने की बात कही गई थी। विडम्बना देखिए, उसी JNU से पढ़े कैप्टन पवन कुमार देश की रक्षा के लिए मातृभूमि की बलि-वेदी पर चढ़ गए।

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले के पंपोर शहर के पास CRPF के रक्षा दल पर हुए आतंकवादी हमले और एनकाउंटर में पैरा ट्रूपर्स के 23 वर्षीया कैप्टन पवन कुमार रविवार को शहीद हो गए। हरियाणा के जीन्द के रहने वाले कैप्टन पवन कुमार का जन्म आर्मी डे के दिन हुआ था।

Pawan Kumar

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कैप्टन पवन कुमार के पिता राजबीर सिंह अपने बेटे की इस शहादत पर कहते हैंः

”मैंने देश के लिए अपने एक बेटे को न्योछावर कर दिया। वह आर्मी के लिए ही बना था। इकलौता बेटा था मेरा, एक ही था, सोचा था देश की सेवा करेगा। लेकिन उसने पूरा काम किया अपना। मुझे उस पर गर्व है।”

जहां पवन कुमार शहीद हुए, वहां कुछ दिनों पहले उन्होंने दो कामयाब ऑपरेशन्स को अंजाम दिया था, जिसमें उन्होंने तीन आतंकियों को मौत के घाट उतारा था।

आतंकियों ने पहले श्रीनगर की ओर जा रही CRPF की बस को अपना निशाना बनाया, जिसके बाद आतंकी नजदीकी आंत्रप्रन्योरशिप डिवेलपमेंट इंस्टिट्यूट (EDI) की इमारत में घुस गए और वहां गोलीबारी शुरू कर दी। उस वक़्त इमारत में कई लोग मौजूद थे। उस समय पहली प्राथमिकता थी, वहां फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की, जिसमें CRPF और लोकल पुलिस ने लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया।

उस दौरान कैप्टन पवन कुमार अपनी टीम के साथ वहां का मोर्चा संभाले हुए थे। मुठभेड़ में पवन कुमार को गोली लगी थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और इलाज़ के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

Pawan Kumar with his friends

पवन कुमार (बीच में) अपने दोस्तों के साथ Facebook

पवन जिसे न रिजर्वेशन से कोई मतलब था और न ही किसी तरह की वामपंथी राजनीति से, उसे सिर्फ एक की फिक्र थी, अपने देश की। उसे सिर्फ एक नाम सुनाई देता था, भारत।

अपनी कर्मभूमि पर जाने से पहले फेसबुक पर कैप्टन पवन का आखिरी पोस्टः “किसी को रिजर्वेशन चाहिए तो किसी को आजादी, भाई। हमें कुछ नहीं चाहिए, भाई। हमें तो चाहिए बस अपनी रजाई।” और देखिए वास्तव में देश का राष्ट्र ध्वज तिरंगा ही उनकी वह रजाई बन गया।

जहां एक पिता अपने बेटे को आखिरी बार देखने से पहले ही कहता हो, हां मुझे उस पर गर्व है। जिस बेटे की मां अपने आंसुओं को पी गई हो। ऐसे देश की हस्ती कभी नहीं मिट सकती, ऐसे देश के टुकड़े-टुकड़े कभी नहीं हो सकते। कभी नहीं, मतलब कभी भी नहीं।


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जहां बेटा तो फौलाद होता है ही, मां-बाप भी फौलाद का जिगर लिए खड़े रहते हैं अपने बेटे की शहादत पर। ऐसे देश को मिटाने, नेस्तेनाबूत करने की साज़िश कभी कामयाब नहीं हो सकती। जय हिंद।

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