84 स्तम्भों पर टिका है कश्मीर का अद्वितीय मार्तन्ड सूर्य मंदिर

Updated on 30 Nov, 2016 at 12:36 pm

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कश्मीर का प्रतिष्ठित मार्तन्ड सूर्य मन्दिर 84 स्तम्भों पर टिका हुआ है। इस मंदिर का निर्माण सूर्यवंशी राजा ललितादित्य ने करवाया था। अनंतनाग के निकट एक पहाड़ पर निर्मित इस सूर्य मंदिर की गणना प्रतापी राजा ललितादित्य के प्रमुख कार्यों में की जाती है।

7वीं सदी के उत्तरार्ध में निर्मित इस मंदिर के 84 स्तम्भ नियमित अंतराल पर रखे गए हैं। इसके निर्माण में चौकोर ईंटों का उपयोग किया गया है, जो उस समय के कलाकारों की कुशलता को दर्शाता है।

इस मंदिर की राजसी वास्तुकला इसे अलग बनाती है। बर्फ से ढंके हुए पहाड़ों की पृष्ठभूमि में बने इस मंदिर को एक करिश्मा माना जाता है। मार्तन्ड मंदिर के प्रांगण से कश्मीर घाटी का मनोरम दृश्य भी देखा जा सकता है।


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हिन्दू मान्यताओं के मुताबिक, सतयुग में कश्यप पत्नी अदिति माता से भगवान विष्णु के वरदान-स्वरूप मार्तन्ड का जन्म हुआ था। उनके नाम पर ही इस मंदिर की स्थापना हुई। मान्यता है कि कारकूट वंश के राजा हर्षवर्धन सूर्य की पहली किरण निकलने पर अपनी दिनचर्या की शुरुआत सूर्य मंदिर में पूजा कर चारों दिशाओं में देवताओं का आह्वान करने के बाद करते थे।

मार्तन्ड सूर्य मंदिर 60 फुट लम्बा और 38 फुट चौड़ा था। इसके चतुर्दिक लगभग 80 प्रकोष्ठों के अवशेष वर्तमान में हैं। इस मंदिर के पूर्वी किनारे पर मुख्य प्रवेश द्वार का मंडप है। इसके द्वारों पर त्रिपार्श्वित चाप (मेहराब) थे, जो इस मंदिर की वास्तुकला की विशेषता है।

कश्मीर का यह मंदिर वहां की खास निर्माण शैली द्योतक है। इसके स्तम्भों में ग्रीक सरंचना का इस्तेमाल भी किया गया है। यह मंदिर वर्तमान में खंडहर हो चुका है इसके भग्नावशेष ही बचे हैं। इसकी खासियत यह है कि मंदिर में उन दिनों इस्तेमाल किए गए बर्तन व सामान आदि अब भी मौजूद हैं।

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