ये क्या! अब शादी करने के लिए सरकार से लेनी पड़ेगी परमिशन?

Updated on 13 Dec, 2018 at 4:40 pm

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भारत में शादियों की क्या अहमियत है इसकी एक बानगी तो आप विराट-अनुष्का और निक-प्रियंका की शादी में देख ही चुके हैं। यहां शादियों का जश्न किसी उत्सव की तरह मनाया जाता है, जो कई दिनों तक चलता है। कई बार तो लोग अपनी ज़िंदगी भर की जमापूंजी शादियों में बहा देते हैं। अगर आप भी अगले साल जनवरी और मार्च 2019 के बीच प्रयागराज में धूमधाम से शादी की प्लानिंग कर रहे हैं तो ज़रा ठहर जाइए क्योंकि आपको अपने कार्यक्रम में बदलाव करना पड़ सकता है।

 

 


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योगी आदित्यनाथ सरकार ने अगले साल प्रयागराज में लगने वाले कुंभ के दौरान विवाह समारोह पर प्रतिबंध लगाने का फ़ैसला किया है।

 

जो लोग शादियों और उससे संबंधित फंक्शंस के लिए पहले से कैटरर्स, गेस्ट हाउस और लॉन बुक करा चुके हैं, वो सरकार के इस फ़रमान से खासे नाराज़ हैं, क्योंकि उनसे अपने कार्यक्रम को रद्ध करने के लिए कहा गया है। लिहाज़ा सरकार का ये फ़रमान अब लोगों के लिए चिंता का विषय बन चुका है।

 

 

सरकार के इस फ़ैसले से शादियों का व्यापार करने वाले व्यापारी काफ़ी दिक्कत में है, क्योंकि उनकी कमाई का एक बड़ा हिस्सा इससे ही आता है। इस आदेश के अनुसार कुंभ स्नान से एक दिन पहले और एक दिन बाद शादी की अनुमति नहीं दी जाएगी।

 

अगले साल जनवरी से मार्च के दौरान प्रयागराज में कुंभ स्नान होना है, लिहाज़ा स्थानीय लोगों से कहा गया है वो उस दौरान की सभी शादियों को रद्ध कर दें।

 

 

लेकिन सरकार के इस फ़ैसले के बाद कई सवाल मुंह बाए खड़े हैं। पहला सवाल ये जिन लोगों ने अपने घर होने वाली शादियों के लिए पहले से ही भुगतान कर दिया है उनका क्या होगा, क्या उन्हें उनका पैसा वापस मिल जाएगा ? फिर एक ऐसा वर्ग भी है, जिनकी आमदनी का एक बड़ा हिस्सा शादी ब्याह से ही आता है, क्या उनकी कमाई के लिए सरकार ने कुछ विचार किया है? जिन लोगों को अपना स्थान बदलकर शादी करनी पड़ेगी उसपर होने वाले खर्च का भुगतान कौन करेगा ? ऐसे ढेरों सवाल है, जिनके लिए किसी की जवाबदेही तय नहीं की गई है।

 



 

भले ही बीजेपी और दिल्ली की आप सरकार में लंबे समय से आपसी मतभेद चल रहे हों, लेकिन योगी सरकार के इस फ़ैसले को दिल्ली की आप सरकार ने भी गंभीरता से ले लिया है।

 

यही वजह है दिल्ली सरकार राजधानी में होने वाली शादियों में मेहमानों की संख्या तय करने पर विचार कर रही है। ये जानकारी दिल्ली सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट को दी गई है।

 

 

जस्टिस मदन बी. लोकुर की अध्यक्षता वाली पीठ को दिल्ली के मुख्य सचिव विजय कुमार देव ने जानकारी देते हुए बताया है 6 दिसंबर के आदेश में कोर्ट द्वारा उठाए गए मुद्दे पर दिल्ली सरकार ने गहनता से विचार किया है। इसके पीछे सरकार का तर्क शादियों में खाना और पानी की बर्बादी को कम करना है।

 

सरकार ने एक सुझाव दिया है जिसके तहत दिल्ली में होने वाली शादियों में कितने गेस्ट आएंगे ये सरकार ही तय करेगी। इसके पीछे दिल्ली सरकार का तर्क शादी समारोहों में भोजन की बर्बादी और पानी के दुरुपयोग को बताया गया है ।

 

 

इस बारे में दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया वो तामझाम वाले शादी समारोहों में अतिथियों की संख्या सीमित करने और कैटरिंग व्यवस्था को संस्थागत करने की नीति पर विचार कर रही है।

हमारे नीति नियंताओं द्वारा लिए गए इस फ़ैसले पर आपकी क्या राय है, अपने सुझाव हमारे साथ ज़रूर साझा करें।


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