इस एक मंत्र से दूर हो सकती हैं आपकी तकलीफें, सुबह उठते ही करें इसका जाप

Updated on 21 May, 2018 at 3:08 pm

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मंत्र एक प्रकार की वाणी है, जो अक्षरों और शब्दों के समूह से बनती है। भारत की प्रचीन विद्याओं में से एक विद्या मंत्र विज्ञान भी है। मुख से बोले जाने वाले इन प्रभावशाली स्वरों का संबंध हमारे शरीर के मर्म स्थानों से भी है। इन मंत्रों के जाप से मनुष्य अपनी आध्यात्मिक शक्ति में वृद्धि करने के साथ- साथ समस्त सुखों को भी प्राप्त कर सकता है।

 

 

आज के समय में तमाम परेशानियों से घिरे लोग शांतिपूर्वक अपना जीवन व्यतीत करना चाहते हैं। हर कोई अपने जीवन को खुशहाल बनाना चाहता है। हम सभी दिन दोगुनी रात चौगुनी तरक्की के लिए हमेशा प्रयासरत रहते हैं। साथ ही अपनी समस्याओं के निवारण के लिए कई प्रकार के उपाय भी करते हैं, जिनमें मंत्र जाप भी शामिल है। आज हम आपको एक ऐसा उपयोगी मंत्र बताने जा रहे हैं, जिसके बेहद चमत्कारी प्रभाव आपके जीवन में सभी प्रकार के दुखों को दूर कर देगें।

 

रोजाना सुबह उठकर इस मंत्र के उच्चारण से आपको आत्मिक शांति की अनुभूति होगी। साथ ही ये मत्रं आपके जीवन को सुख समृद्धि से भर देगा। सच्चे मन से इस मंत्र का जाप करने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी होंगी।

 

 

सुबह उठते ही इस एक मंत्र के जाप से आपके सारे दुख दूर हो सकते हैं। वामन पुराण के चतुर्दशोध्याय यानी 14वें अध्याय के 21 से 25वें श्लोक में स्वंय महादेव ने इस मंत्र स्तुति का वर्णन किया है।

 

भगवान शिव के अनुसार जो भी मनुष्य सुबह उठकर इस मंत्र का जाप करता है, उसके बुरे से बुरे समय का अंत हो जाता है।

 

 

मंत्र स्तुति-


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ब्रह्मा मुरारिरित्रपुरान्कारी भानु: शशी भूमिसुतो बुधश्च।

गुरुश्च शुक्र: सह भानुजेन कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्।।

भृगुर्वसिष्ठ: क्रतुरडिराश्च मनु: पुलस्त्य: पुलद्ध: सगौतम: ।

रैभ्यो मरीचिश्चयवनो ऋभुश्च कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्।।

सनत्कुमार: सनक: सनन्दन: सनातनोप्यासुरिपिडलौ च।

सप्त स्वरा: सप्त रसातलाश्र्च कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्।।

 

ये है इस मंत्र का अर्थ:

ब्रह्मा, विष्णु, शिव ये देवता तथा सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि ये सभी ग्रह मेरी सुबह और दिन को मंगलमय बनाएं। भृगु, वसिष्ठ, क्रतु, अडिग्रा, मनु, पुलस्त्य, पुलह, गौतम, रैभ्य, मरीच, च्यवन और ऋभु- ये सभी ऋषि मेरी सुबह और दिन को मंगलमय बनाएं। सनत्कुमार, सनक, सन्नदन, सनातन, आसुरि, पिडग्ल, सातों स्वर और सातों रसातल- ये सभी मेरी सुबह और दिन को मंगलमय बनाएं।

 

इसके अतिरिक्त आप मंत्र स्तुति के इस दोहे के जाप से ही बराबर लाभ प्राप्त कर सकते है:

 

ब्रह्मा मुरारिरित्रपुरान्कारी भानु: शशी भूमिसुतो बुधश्च।

गुरुश्च शुक्र: सह भानुजेन कुर्वन्तु सर्वे मम सुप्रभातम्।।

इसका अर्थ है:

ब्रह्मा, विष्णु, शिव ये देवता तथा सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि ये सभी ग्रह मेरी सुबह और दिन को मंगलमय बनाएं।

ये मंत्र स्तुति आपके जीवन में एक चमत्कारी बदलाव ला सकती है। इसकी अलौकिक शक्ति आपके जीवन को खुशियों से भर देगी। हर मनुष्य अपने जीवन में यही कामना करता  है कि उसके घर में सुख समृद्धि बनी रहे। इस मंत्र के उच्चारण से आपका जीवन सदैव सुखमय बना रहेगा।

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