बिना हवाई जहाज और ट्रेन के 121 देश घूम चुका है यह शख़्स, विश्व भ्रमण का है जूनून

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Updated on 9 Jan, 2017 at 10:59 pm

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“मुसाफिर हूं मैं यारों, न घर है न ठिकाना, मुझे चलते जाना है, बस चलते जाना।”

गुलज़ार का लिखा यह गीत उस हर-एक शख़्स, हर उस मुसाफिर के सफर की कहानी है, जिसका सपना मंज़िल पाने के जुनून से गुजरती है। फिर जब दीवानगी विश्व भ्रमण की हो तो भला मुसाफिर के जुनूनियत के क्या कहने।

ऐसे ही 37 साल के एक जुनूनी मुसाफिर हैं थॉर पेडेरसेन, जो डेनमार्क के रहने वाले हैं। वह अभी तक अपने जुनून के चलते 121 देशों का भ्रमण कर चुके हैं। उनकी दीवानगी है कि वह पूरी दुनिया देखें। पर इस रोमांचक सफर के लिए उन्होंने जो राह चुनी है, वो इसको और भी रोचक बनाती हैं।

मालवाहक पानी के जहाज (कार्गो शिप) से दुनिया नापने का है जुनून। घर लौटने से पहले 40 और देशों में रात गुजारने का है इरादा।

तीन साल पहले शुरू हुआ यह रोमांचक सफर थॉर पेडेरसेन के ज़िन्दगी का मील का पत्थर साबित होगा, उन्हें यह खुद यकीन नहीं था। थॉर अब तक 1,51,450 किमी का सफर तय कर 121 देशों को नाप चुके हैं। वो भी बिना हवाई या ट्रेन यात्रा के मदद से, जो अपने आप में एक अनूठा रिकॉर्ड बन सकता है। दरअसल इतिहास में ऐसे न के बराबर लोग हैं, जिन्होंने एक मालवाहक पानी के जहाज से इतनी दूरी तय की हो वो भी बिना हवाई यात्रा के।


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थॉर बताते हैं कि जीवन गति काफी तेज़ है, इसलिए उनका जल्द से जल्द बाकी बचे देशों में भी पहुचने का इरादा है। वे कहते हैं कि इस सफर में कभी-कभी उन्हें अकेलपन का एहसास होता है। लेकिन आज तक किसी ने ऐसा सफर मुमकिन नहीं किया है, जिसके लिए वे खास रोमांचित हैं।

थॉर को उम्मीद है कि उनके रोमांचक सफर कि कहानी और लोगों को यात्रा करने के लिए प्रेरित कर सकती है। थॉर बताते हैं कि हर देश में वे 24 घंटे बिताते हैं, जिनका अनुभव उनके लिए बेहद अनमोल है।

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