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चोट लगने के बावजूद 48 घंटे नाव चलाकर बचाई 500 लोगों की जान

7:57 pm 4 Sep, 2017

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उत्तर-पूर्वी भारत के कई हिस्सों में आई बाढ़ ने हज़ारों लोगों की ज़िंदगी बर्बाद कर दी है। बिहार, असम और पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में बाढ़ की वजह से लोग अपना घर छोड़ने को मजबूर हो गए। हर कोई अपना और अपने परिवार की हिफाजत करना चाहता है, लेकिन इन सबके बीच एक शख्स ऐसा भी है, जिसने इंसानियत की मिसाल पेश करते हुए 500 लोगों की जान बचाई।

पूर्णिया ज़िले के जलालगढ़ गांव के रहने वाले गिरजानंद ऋषि ने अपनी जान की परवाह न करते हुए दूसरों की जान बचाई। एक हिंदी अखबार की खबर के मुताबिक, 13 अगस्त की रात जब गांव के ज़्यादातर लोग सो गए, तभी अचानक लोगों के घर में पानी घुसने लगा, जिससे हर तरफ अफरातफरी का माहौल बन गया। इस माहौल के बीच गांव के ही रहने वाले गिरजानंद ऋषि किसी फरिश्ते की तरह आए और लोगों को हिम्मत रखने को कहा।

गांव में रहने वाले एक महिला के मुताबिकः

“लालू टोला में करीब 108 परिवार के बीच 500 लोग रहते हैं। हमें लगा कि हम सबकी ज़िंदगी खतरे में है और किसी का बचना नामुमकिन है। यदि गिरजानंद नहीं होता, तो हम लोगों का बचना नामुमकिन होता।”


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गांव के बुजुर्ग गिरिजानंद कहते हैंः

“चारों तरफ अंधेरा था. हर तरफ लोग हैरान-परेशान थे, हमने नाव निकाली और बच्चे, महिलाओं के बाद दूसरे लोगों को कोसी नदी पार कराने लगे।”

इस काम में गिरजानंद का साथ गांव के ही एक अन्य शख्स धीमा ऋषि ने दिया। दोनों ने मिलकर करीब 48 घंटों तक लोगों को नदी पार कराई। नाव में छेद होने के बावजूद दोनों जान पर खेल कर दो दिनों तक लगातार लोगों को सुरक्षित स्थान पहुंचाने में लगे रहे। इस काम को अंजाम देते हुए गिरजानंद के बाएं हाथ में मोच आ गई, लेकिन उन्हें चोट की फिक्र नहीं है, बल्कि उन्हे खुशी है कि उन्होंने इतने लोगों की जान बचाई।

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