सद्दाम हुसैन को भारत में नहीं मिल रही है नौकरी, अब तक 40 बार रिजेक्ट हो चुके हैं

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Updated on 20 Mar, 2017 at 12:05 pm

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अंग्रेजी के महान साहित्यकार शेक्सपियर ने कभी कहा थाः नाम में क्या रखा है। अगर आज वह होते, तो उनको पता चलता कि नाम में वाकई बहुत कुछ रखा है।

जमशेदपुर के निवासी मरीन इन्जीनियर सद्दाम हुसैन को महज इसलिए नौकरी नहीं मिल रही है, क्योंकि उनका नाम सद्दाम हुसैन है। जी हां, इराक के तानाशाह नेता सद्दाम हुसैन के साथ नाम की समानता होने की कीमत अब यह 25 वर्षीय भारतीय चुका रहा है।

तमिलनाडु की नूरुल इस्लाम यूनिवर्सिटी से मरीन इन्जीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले सद्दाम का कहना है कि वह अब नौकरी के साक्षात्कारों में 40 बार रिजेक्ट हो चुके हैं। और वह अब भी खाली बैठे हैं।

नौकरी मिलने में आ रही अड़चनों की वजह से सद्दाम हुसैन ने अपना नाम बदलने का फैसला कर लिया है। अब वह साजिद बन चुके हैं। इस प्रक्रिया में वक्त लगा है, लिए उन्हें नौकरी मिलने में भी देर हो रही है।


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सद्दाम कहते हैंः

“यह नाम सद्दाम के दादा का दिया हुआ है। मेरे साथ पढ़ने वालों को नौकरी मिल चुकी है। मुझे लोग नौकरी पर रखने से डरते हैं।”

सद्दाम हुसैन का कहना है कि नए नाम से पासपोर्ट ड्राइविंग लाइसेन्स व इससे संबंधित अन्य कागजात बना लेने से परेशानी कम हो जाएंगी। हालांकि, समस्या स्कूल के सर्टिफिकेट को लेकर अब भी है। इन सर्टिफिकेट में नाम बदलने की पूरी प्रक्रिया जटिल है और इसमें काफी समय लग रहा है। इसके लिए उन्हें अदालत तक जाना पड़ा है।

सद्दाम मानते हैं कि यही समस्या कॉलेज के सर्टिफिकेट बदलने के समय भी आने वाली है।

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