ममता सरकार ने स्वतंत्रता दिवस पर केंद्र का निर्देश मानने से किया इनकार, लेकिन क्यों ?

Updated on 14 Aug, 2017 at 12:08 pm

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केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद जिस तरह से पश्चिम बंगाल में भाजपा की पकड़ मजबूत होती जा रही है, उससे वर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चिंता बढ़ती जा रही है। लिहाजा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और भाजपा के विरोध का एजेन्डा अपनाया है।

ताजा मामले में पश्चिम बंगाल की सरकार ने स्कूलों को केंद्र का सर्कुलर न मानने का निर्देश दिया है। केंद्र की ओर से स्वतंत्रता दिवस से पहले सभी राज्यों से देशभक्ति की भावना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यू इंडिया (नया भारत) की सोच को लेकर जोश जगाने के लिए स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित करने को कहा गया था।

वहीं, मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर ने तृणमूल सरकार के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।

जावड़ेकर का कहना हैः


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“प्रधानमंत्री के संकल्प सिद्धि का शपथ दिलाना या स्वतंत्रता संग्राम या विभिन्न युद्धों, आतंकी हमलों में शहीदों को याद करना स्कूलों के लिए बाध्यकारी नहीं है। यह देश के सेक्यूलर एजेंडे का हिस्सा है, न कि राजनीतिक पार्टी का।”

उन्होंने पश्चिम बंगाल सर्व शिक्षा मिशन के राज्य परियोजना निदेशक का मेमो दिखाया, जिसमें स्कूल शिक्षा विभाग को केंद्र के सर्कुलर के आधार पर स्वतंत्रता दिवस नहीं मनाने को कहा गया है।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय के संयुक्त सचिव मनीष गर्ग ने स्कूलों में कार्यक्रम आयोजन के लिए राज्यों को लिखे पत्र में कहा है कि उम्मीद है देशभर में त्योहार और देशभक्ति की भावना जगाने के उद्देश्य से इस महत्वपूर्ण अवसर को मनाया जाएगा। यह नए भारत की सोच के मिशन में देश के हर नागरिक को शामिल करने के लिए आंदोलन है। नए भारत की सोच गरीबी, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, सांप्रदायिकता और जातिवाद मुक्त भारत है।

पत्र में राज्यों से 9 से 30 अगस्त तक चलने वाले कार्यक्रम का प्रचार करने को कहा गया है, ताकि छात्रों और लोगों में उत्साह जागे।

इसके अंतर्गत शपथ ग्रहण के अलावा स्वतंत्रता संग्राम और देश के विकास पर क्विज प्रतियोगिता, पेंटिंग प्रतियोगिता कराने को भी कहा गया है। क्विज नरेंद्र मोदी एप या सरकार के आधिकारिक पोर्टल से डाउनलोड किए जा सकते हैं।

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