ममता ने मोहर्रम की वजह से दुर्गा मूर्ति के विसर्जन पर लगाई रोक

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Updated on 24 Aug, 2017 at 10:26 pm

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगते रहे हैं कि वह मुस्लिम तुष्टीकरण को प्रश्रय देती हैं। चाहे मालदा में दंगे की घटना हो, या बशीरहाट में साम्प्रदायिक हिंसा, तृणमूल कांग्रेस की सरकार हमेशा बहुसंख्यक हिन्दुओं के खिलाफ और मुसलमानों के समर्थन में दिखती है। अब ममता बनर्जी के मुस्लिम तुष्टीकरण अभियान का ताजा मामला सामने आया है।

ममता बनर्जी सरकार ने इस साल मोहर्रम की वजह से दुर्गा पूजा के बाद होने वाले मूर्ति विसर्जन पर 30 सितंबर की शाम से 1 अक्टूबर की सुबह तक रोक लगा दी है।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि इस वर्ष दुर्गा पूजा और मोहर्रम एक ही दिन है। इसलिए मोहर्रम के 24 घंटों को छोड़कर 2, 3 और 4 अक्टूबर को मूर्ति विसर्जन किया जा सकता है। ममता बनर्जी के आदेश का मतलब है कि कोलकाता में दशहरे के दिन हिन्दू समुदाय किसी तरह का जश्न नहीं मनाएगा। न तो सुहागिन महिलाएं सिन्दुर खेला में भाग लेंगी, न ही जुलूस निकलेगा और न ही ढोल-ताशे बजेंगे। इस दिन मुसलमानों को मातम मनाने की छूट होगी, क्योंकि इसी दशहरे के दिन मोहर्रम है।

कुछ इसी तरह का आदेश ममता बनर्जी ने पिछले साल भी जारी किया था। इस पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने उन्हें फटकार लगाई थी और इस मामले को मुस्लिम तुष्टीकरण करार दिया था। हाईकोर्ट ने कहा था कि इससे पहले कभी विजयादशमी के मौके पर मूर्ति विसर्जन पर रोक नहीं लगी थी।

ममता बनर्जी के आदेश से कई सवाल उठ खड़े हुए हैं।

विजयादशमी यानी 30 सितंबर को दुर्गा पूजा का उत्सव खत्म हो जाएगा तो भला हिन्दू समुदाय मूर्ति विसर्जन क्यों करे?
क्या ममता बनर्जी को सिर्फ मुसलमानों की चिन्ता सता रही है?
क्या दशहरे को देखते हुए ममता बनर्जी मुसलमानों को मोहर्रम का मातम अगले दिन मनाने के लिए कह सकती हैं?
आखिर इस धर्म-निरपेक्ष गणतांत्रिक देश में हिन्दू और मुसलमान एक साथ अपना-अपना त्यौहार क्यों नहीं मना सकते?


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