मालदा दंगों की लीपापोती कर रही है ममता सरकार

author image
Updated on 14 Jan, 2016 at 12:08 pm

Advertisement

एक मशहूर कहावत है। जब रोम जल रहा था, तब नीरो बांसुरी बजा रहा था। पश्चिम बंगाल और ममता बनर्जी इस कहावत का भारतीय संस्करण हैं। यहां के परिप्रेक्ष्य में कहा जा सकता है कि जब मालदा में साम्प्रदायिक हिंसा की आग लगी हुई थी, तब ममता बनर्जी गजल सुन रहीं थीं।

यह बात सही भी है। जब पूरे देश में मालदा दंगों की चर्चा हो रही है, तब ममता बनर्जी पाकिस्तानी गजल गायक गुलाम अली के कार्यक्रम आयोजन में व्यस्त थीं। मालदा में साम्प्रदायिक हिंसा की ऐतिहासिक घटना को ममता बनर्जी की सरकार ने एक छोटी सी घटना करार देते हुए इससे सीधे तौर पर पल्ला झाड़ लिया। यही नहीं, अब पूरे मामले की लीपापोती की जा रही है।

रिपोर्टः मालदा की फिजाओं में अब भी तैर रही है साम्प्रदायिक हिंसा की गंध


Advertisement

यहां तक कि केन्द्र की भाजपा सरकार भी इस मामले में ममता के साथ खड़ी दिख रही है। केन्द्र की तरफ से कहा गया है कि मालदा में जांच के लिए कोई आधिकारिक केन्द्रीय टीम नहीं भेजी जाएगी। केन्द्र मानता है कि कानून-व्यवस्था का मसला राज्य सरकार का है। हालांकि, इससे पहले मालदा जाने की कोशिश कर रहे कई भाजपा नेताओं को राज्य सरकार की तरफ से रोक दिया गया था।

अंजुमन अहले सुन्नतुल जमात (एजेएस) ने बांटा था यह पर्चा।

ममता बनर्जी का कहना है कि यह कोई साम्प्रदायिक घटना नहीं थी, बल्कि आपसी रंजिश का मसला है। भारतीय जनता पार्टी के राज्य नेतृत्व से लेकर केन्द्रीय नेतृत्व तक ममता के सुर में सुर मिलाकर मालदा की घटना के साम्प्रदायिक होने से इन्कार कर रहा है। और जहां तक जांच का सवाल है तो इसे इसी दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।

रिपोर्टः मालदा दंगा मामले में कालियाचक के पुलिस अधिकारियों पर गिरी गाज

पश्चिम बंगाल भाजपा का एक तीन सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिला था और मालदा हिंसा की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी गठन करने की मांग की थी। प्रतिनिधिमंडल का कहना था कि इस हिंसा का संबंध नकली मुद्रा, नशीले पदार्थों की तस्करी और अवैध घुसपैठ से है।



पहले तो राज्य सरकार ने इस पूरे मसले पर चुप्पी साधे रखी। दो दिन बाद इस संंबंध में 10 लोगों को गिरफ्तार भी किया गया, लेकिन मुख्य आरोपियों को अब तक नहीं पकड़ा जा सका है। कुल मिलाकर, सरकार, पुलिस और प्रशासन की भूमिका लापरवाही से लबरेज रही है। मालदा पश्चिम बंगाल का मुस्लिम बहुल जिला है। यहां मुसलमानों की जनसंख्या करीब 60 फीसदी है।

3 जनवरी को हुई इस भीषण हिंसा के बाद पुलिस अब इदारा ए शरिया संगठन की ओर से जारी खत पर दस्तखत करने वाले 51 लोगों की तलाश कर रही है। इस खत के जरिए ही रैली आयोजित करने की अनुमति मांगी गई थी।

रिपोर्टः बंगाल में अवैध मदरसों से जुड़े हैं आतंक के तार

इस घटना के बाद से लेकर अब तक इदारा ए शरिया का दफ्तर नहीं खुला है। यह दफ्तर कालियाचक थानान्तर्गत करामत अली मार्केट की पहली मंजिल पर स्थित है। इस संगठन का संबंध बिहार में जनता दल (युनाइटेड) के राज्यसभा सदस्य गुलाम रसूल बलियावी के साथ साबित हुआ है। मालदा हिंसा के पीछे बलियावी की भूमिका भी संदिग्ध है।

गौरतलब है कि अखिल भारतीय हिंदू महासभा के स्वयंभू नेता कमलेश तिवारी ने पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कथित विवादित बयान दियाय था, जिसके विरोध में करीब ढाई लाख मुसलमानों ने मालदा में रैली की थी। बाद में यह रैली हिंसक भीड़ में तब्दील हो गई। राष्ट्रीय राजमार्ग 34 पर दर्जनों वाहन फूंक दिए गए और हिन्दुओं के कई घरों में तोड़फोड़ की गई। यहां तक कि कालियाचक थाने को भी आग के हवाले कर दिया गया।


Advertisement

आपके विचार


  • Advertisement