पश्चिम बंगाल में संघ संचालित स्कूलों में पाठ्यक्रमों से रामायण, महाभारत के अंश हटाना चाहती है ममता सरकार

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Updated on 16 Mar, 2017 at 4:08 pm

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पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार ने निर्देश दिया है कि संघ परिवार संचालित स्कूलों में पढ़ाए जा रहे पाठ्यक्रमों में से रामायण और महाभारत के अंश हटा दिए जाएं।

इस रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के इस निर्देश का विरोध शुरू हो गया है। सरस्वती शिशु मंदिर के शिक्षक-शिक्षिकाएं व संचालन समिति के अधिकारियों ने बुधवार को मालदा जिले के विद्यालय निरीक्षक से इस पूरे मसले की शिकायत की है।

गौरतलब है कि ममता बनर्जी सरकार की नजर सरस्वती शिशु मंदिर सहित ऐसे विद्यालयों पर है, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के करीबी बताए जाते हैं। शिशु मंदिर, विवेकानंद शिशु मंदिर, सारदा शिशु तीर्थ जैसे विद्यालय अलग-अलग ट्रस्ट के तत्वावधान में चलाए जाते हैं। पश्चिम बंगाल में इस तरह के करीब 800 स्कूल संचालित किए जाते हैं, जिनमें छात्रों की संख्या 60 हजार के करीब है।


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ममता बनर्जी की सरकार ने बुधवार को ‘धार्मिक असहिष्णुता को बढ़ावा देने’ और ‘राज्य द्वारा अनिवार्य पाठ्यक्रम न पढ़ाने’ के आरोप में 125 स्कूलों को नोटिस जारी किया था। अब खबर है कि इन विद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि ये अपने पाठ्यक्रमों से रामायण और महाभारत के अंश हटा दें।

मालदा जिले के शिक्षक व सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय संचालन समिति के सचिव गोविंद चंद्र मंडल ने राज्य सरकार के इस निर्णय पर विरोध जताया है।



रिपोर्ट में गोविंद चंद्र मंडल के हवाले बताया गया हैः

“दुनिया में चार महाकाव्य हैं इनमें इलियाड, ओडीसी, रामायण व महाभारत शामिल हैं। ये कोई धर्म ग्रंथ नहीं हैं।”

मंडल ने आरोप लगाया कि राज्य के मदरसों में क्या पढ़ाया जाता है या नहीं पढ़ाया जाता, इसके बारे में लोगों को पता नहीं है। मंडल का कहना है कि इन विद्यालयों में विभिन्न मनीषियों की जीवनी के बारे में पढ़ाया जाता है, लेकिन मदरसों में किसी भारतीय मनीषी का नाम उच्चारण नहीं किया जाता है।

वहीं, दूसरी तरफ प्रदेश भाजपा नेता अजय गांगुली कहते हैं कि हाल ही में संपन्न हुए पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के परिणाम की वजह से सत्तादल आतंकित है। इस वजह से संघ परिवार के घनिष्ठ संस्थानों पर वार करने के प्रयास किए जा रहे हैं। शिशु मंदिरों में रामायण महाभारत पर पाबंदी का फतवा इसका सबूत है।


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