मालदा दंगे से पल्ला झाड़ा ममता सरकार ने; केन्द्र को सौंपी रिपोर्ट

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Updated on 15 Jan, 2016 at 8:29 pm

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पश्चिम बंगाल सरकार ने मालदा में हुए साम्प्रदायिक दंगों से पल्ला झाड़ते हुए अपनी रिपोर्ट केन्द्र सरकार को सौंप दी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मालदा में हुई झड़प साम्प्रदायिक हिंसा नही थी, बल्कि हिन्दू महासभा के स्वयंभू नेता कमलेश तिवारी द्वारा कथित रूप से पैगम्बर मुहम्मद पर अपमानजक टिप्पणी के खिलाफ यह विरोध पूर्वनियोजित था।

रिपोर्ट के मुताबिक, करीब महीने भर पहले विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई गई थी, लेकिन अचानक हुई हिंसा को किसी साजिश का हिस्सा नहीं माना जा सकता है।

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गत 3 जनवरी को मालदा के कालियाचक इलाके में इदारा-ए-शरिया द्वारा आयोजित इस विशाल रैली में सात मुस्लिम संगठनों और 10 स्थानीय क्लब के सदस्य शामिल हुए थे। यहां जुटे मुस्लिम नेताओं के भड़काऊ भाषण के बाद भी़ड़ हिंसक हो गई और इलाके में दंगा फैल गया था।

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मुस्लिम युवाओं ने राष्ट्रीय राजमार्ग 34 पर दर्जनों वाहनों में आग लगा दी और कई हिन्दुओं के घरों को लूट लिया। इसी क्रम में कालियाचक थाने को भी आग लगा दी गई थी।

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कालियाचक में जमा 2 लाख लोगों की उन्मादी भीड़ दो समूहों में बंटी हुई थी। एक समूह में नशीली दवाओं के तस्कर और नकली नोटों का कारोबार करने वाले अपराधी थे, वहीं दूसरे समूह में कमलेश तिवारी की कथित टिप्पणी का विरोध करने वाले लोग थे।

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रिपोर्ट के मुताबिक, तस्करों और अपराधियों के समूह ने गुस्साई भीड़ को हिंसा करने के लिए उकसाया। यही वजह थी कि भीड़ ने तोड़फोड़ की और थाने पर हमला बोल दिया।

इस बीच, कहा गया है कि इदारा-ए-शरिया नामक इस संगठन के नेता फरार बताए जाते हैं। खास बात यह है कि इस संगठन को विरोध प्रदर्शन करने के लिए बनाया गया था। यही नहीं, संगठन ने विरोध प्रदर्शन के आयोजन के लिए एक दफ्तर भी खोल रखा था।

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