ममता बनर्जी के लिए ‘नंदीग्राम’ साबित होगा भांगड़ ?

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Updated on 18 Jan, 2017 at 11:25 am

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पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित भांगड़ में विद्युत सब-स्टेशन के लिए जमीन अधिग्रहण के खिलाफ स्थानीय लोगों के आंदोलन ने हिंसक रूप ले लिया। इस घटना में दो लोगों की मौत हो गई है। पिछले दिनों ममता बनर्जी की सरकार ने विद्युत सब-स्टेशन के लिए जमीन अधिग्रहण किया था। अब ग्रामीण पावरग्रिड को बंद करने तथा अपनी जमीन की वापसी के लिए आंदोलन कर रहे हैं।

आंदोलनकारियों के दबाव में सरकार ने सोमवार को 300 करोड़ रुपए की पावरग्रिड परियोजना को बंद कर दिया था, और इसे स्थानांतरित किए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, मंगलवार को ग्रामीण एक साथ जुटे और राज्य सरकार का विरोध शुरू किया। पुलिस जब प्रदर्शनकारियों को शांत कराने पहुंची तो दोनों पक्ष एक-दूसरे से उलझ गए। ग्रामीणों से पुलिस पर ईंट-पत्थरों से हमला कर दिया।


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इस घटना में दो आंदोलनकारी घायल हो गए, जिनकी बाद में मौत हो गई। अब तक यह साफ नहीं हो सका है कि इस घटना में आंदोलनकारी पुलिस की गोली से मरे या कोई और कारण था।

भांगड़ में राज्य सरकार के खिलाफ इस आंदोलन से पश्चिम बंगाल में नंदीग्राम और सिंगूर जमीन अधिग्रहण विवाद की यादें ताजा हो गईं हैं। जमीन अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन चलाकर राज्य की सत्ता में आने वाली तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ माहौल गर्म है। बंगाल के अलग-अलग जिलों में साम्प्रदायिक दंगों से जूझ रही राज्य सरकार को अब राज्य की अलग-अलग परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रण के खिलाफ चल रहे आंदोलनों से भी दो-चार होना पड़ रहा है।

राज्य सरकार ने माना है कि बंगाल में जमीन अधिग्रण को लेकर लोगों में असंतोष है, हालांकि, सरकार ने लोगों पर पुलिसिया कार्रवाई से इन्कार किया है। राज्य के ऊर्जा मंत्री शोभनदेव चट्टोपाध्याय का कहना है कि अधिक मुआवजे की मांग को लेकर किसान आंदोलन कर रहे थे तो काम पहले से ही बंद करवा दिया गया था।

ऐसा बताने वालों की भी कमी नहीं है कि भांगड़ा का मामला तृणमूल कांग्रेस के ही दो गुटों के बीच संघर्ष का है। सूत्र कहते हैं कि स्थानीय तृणमूल नेता अराबुल इस्लाम व विधायक अब्दुर रज्जाक मोल्ला के बीच विधानसभा चुनाव के पहले से ही तनाव रहा है। दोनों गुटों के नेता व समर्थक आपस में कई बार भिड़ चुके हैं। गौरतलब है कि अब्दुर रज्जाक मोल्ला मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के कद्दावर नेता रहे है। उन्होंने विधानसभा चुनावों से ठीक पहले तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया था। अब कहा जा रहा है कि उनके गुट की अराबुल इस्लाम के गुट के साथ आए दिन झड़प होती रहती है।

भांगड़ में उपजे घटनाक्रमों को देखते हुए राजनीतिक समीक्षक यह मान रहे हैं कि सिंगूर और नंदीग्राम में जिन जमीन अधिग्रण विरोधी आंदोलोंनों के माध्यम से लोगों ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी को सत्ता से बेदखल कर दिया था, अब वही ममता बनर्जी के साथ भी होने जा रहा है। तो क्या ममता बनर्जी के लिए साबित होगा भांगड़ ‘नंदीग्राम’ साबित होगा?

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