धार्मिक असहिष्णुता बढ़ावा देने के आरोप में विद्या भारती के 125 स्कूलों को बंद करना चाहती है ममता सरकार

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6:52 pm 9 Mar, 2017

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पश्चिम बंगाल में लगातार बढ़ रहे इस्लामिक कट्टरपंथ के खतरों को नजरअंदाज करते हुए राज्य की ममता बनर्जी सरकार अब विद्या भारती स्कूलों को निशाना बना रही है। माना जाता है कि ये स्कूल जिन ट्रस्ट के तत्वावधान में चलाए जाते हैं, वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के करीबी हैं।

टाइम्स ऑफ इन्डिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, ममता बनर्जी की सरकार ने बुधवार को ‘धार्मिक असहिष्णुता को बढ़ावा देने’ और ‘राज्य द्वारा अनिवार्य पाठ्यक्रम न पढ़ाने’ के आरोप में 125 स्कूलों को नोटिस जारी किया है।

इन सभी 125 स्कूलों का संचालन तीन ट्रस्ट शारदा शिशु तीर्थ, सरस्वती शिशु मंदिर तथा विवेकानंद विद्या विकास परिषद करते हैं। पश्चिम बंगाल में इन स्कूलों की संख्या 350 है और इनमें 60 हजार से अधिक छात्र पढ़ते हैं।


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इन 125 स्कूलों को बंद करने की स्थिति में हजारों छात्र सीधे तौर पर प्रभावित होंगे।

माना जा रहा है कि राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इन स्कूलों की एक सूची दी है, जिनमें इन सभी 125 स्कूलों के नाम हैं। इन स्कूलों को नोटिस जारी किया गया है।

पार्थ चटर्जी ने कहाः

“हमने इन स्कूलों से जवाब मांगा है कि वे राज्य द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम से क्यों हट रहे हैं। हमने फैसला किया है कि उनकी ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं आया तो उनकी मान्यता वापस ले ली जाएगी।”

इस मामले को मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के विधायक मानस मुखर्जी ने विधानसभा में उठाया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि राज्य में 350 स्कूल धार्मिक असहिष्णुता को बढ़ावा दे रहे हैं जो कि राज्य के बहु-धार्मिक और बहु-संस्कृति चरित्र के खिलाफ है।

ममता बनर्जी की सरकार केन्द्र में भाजपा सरकार का लगातार विरोध कर रही है। चाहे नोटबंदी का मसला हो या फिर विभिन्न केन्द्रीय योजनाओं को आधार से जोड़े जाने की, केन्द्र को पश्चिम बंगाल सरकार के विरोध का सामना करना पड़ रहा है।

विरोध के स्वर इस कदर तेज हैं कि ममता के करीबी समझे जाने वाले कोलकाता के टीपू सुल्तान मस्जिद के मौलाना नुरुर रहमान बरकती ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम फतवा जारी कर दिया। यहां तक कि एक टीवी चैनल पर लाइव डिबेट के दौरान वह प्रगतिशील लेखक तारेक फतेह को भी सिर कलम करने की धमकी दे डाली।

इन स्कूलों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई का विरोध भी शुरू हो गया है।

पश्चिम बंगाल में 2 हजार से अधिक अवैध मदरसे हैं, जहां कट्टरपंथ की शिक्षा आम है। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि इन अवैध मदरसों को सऊदी अरब तथा मध्य-पूर्व के अन्य देशों से वहाबी स्त्रोतों से बेहिसाब धन मिलता है। इन मदरसों में इस्लामिक कट्टरपंथ की शिक्षा मिलती है, जो भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ है।

हालांकि, ममता बनर्जी की सरकार को इन मदरसों से कोई लेना-देना नहीं है और वह गलती से भी इन मदरसों पर लगाम लगाने की बात नहीं करतीं। इससे संभवतः उनकी “सेकुलर छवि” को नुकसान हो सकता है।

इस बीच, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलिप घोष ने कहा कि ये 350 स्कूल विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा निर्धारित पाठ्यक्रम का पालन करते हैं। उन्होंने कहा कि इन स्कूलों पर कार्रवाई कतई उचित नहीं है।


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