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शहीदी के बाद भी सीमा पर देश की रक्षा करता है यह सैनिक; हर महीने मिलती है सैलरी और छुट्टी भी

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1:05 pm 9 Dec, 2015

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अगर कोई आपको कहे कि एक सैनिक अपनी मौत के बाद भी ड्यूटी पर तैनात है, तो क्या आप विश्वास करेंगे? शायद नहीं। क्योंकि वैज्ञानिकता के लिहाज से यह विश्वास करने योग्य बात नहीं है। लेकिन सिक्किम के लोग ऐसा नहीं मानते। जी हां, यहां के लोगों का मानना है कि पंजाब रेजिमेन्ट के जवान हरभजन सिंह की आत्मा पिछले 45 सालों से अनवरत देश की रक्षा कर रही है।

यहां तक कि सैनिकों का भी मानना है कि हरभजन सिंह की आत्मा चीनी सीमा की तरफ से होने वाले खतरे से उन्हें आगाह कर देते हैं। और तो और खुद चीनी सैनिक भी इस पर विश्वास करते हैं। यही वजह है कि भारत और चीन के बीच होने वाली हर फ्लैग मीटिंग में हरभजन सिंह के नाम की एक खाली कुर्सी लगाईं जाती है ताकि वह इस बैठक का हिस्सा बन सकें।

बाबा हरभजन सिंह का मन्दिर

हरभजन सिंह पंजाब रेजिमेन्ट के जवान थे। वह 1966 में सेना में भर्ती हुए थे और सिर्फ दो साल बाद 1968 में एक दुर्घटना में उनकी मौत हो गई। दरअसल, एक दिन वह खच्चर पर बैठकर नदी पार कर रहे थे, तभी तेज धारा में बह गए। मान्यताओं के मुताबिक लगातार तलाशी के बावजूद जब उनका शरीर नहीं मिला तब उन्होंने अपने एक साथी सैनिक के सपने में आकर शव की जगह बताई। बाद में उनके शव को बरामद कर लिया गया इसका अंतिम संस्कार किया गया। इस घटना के बाद सैनिकों की उनमें आस्था बढ़ गई और एक बंकर को मंदिर का रूप दे दिया गया।


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बाद में हरभजन सिंह के चमत्कार बढ़ने लगे और इस मंदिर को ‘बाबा हरभजन सिंह मंदिर’ का नाम दे दिया गया। समुद्रतल से 13 हजार मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस मंदिर में बाबा हरभजन सिंह की एक फोटो और उनका सामान रख हुआ है। यह मंदिर गंगटोक में जेलेप्ला दर्रे और नाथुला दर्रे के बीच स्थित है।

आज भी ड्यूटी पर तैनात हैं हरभजन सिंह

हरभजन सिंह के बारे में कहा जाता है कि वह आज भी ड्यूटी पर हैं। और तो और उन्हें हर महीने बकायदा तनख्वाह दी जाती है। सेना में उनका एक रैन्क है और नियम के मुताबिक समय आने पर उनका प्रमोशन भी किया जाता है।

हाल तक उन्हें साल में 2 महीने की छुट्टी भी मिलती थी। इसके लिए ट्रेन में सीट रिजर्व किया जाता था। दो महीने पूरे होने पर उनकी वापसी होती थी। स्थानीय लोग कहते हैं कि बाबा का छुट्टी पर जाना और वापस लौटना एक बड़ा धार्मिक आयोजन के रूप में तब्दील हो रहा था, इसलिए सेना ने उनकी छुट्टी पर रोक लगा दी। अब बाबा हर वक्त ड्यूटी पर रहते हैं। यानि पूरे 12 महीने 24 घंटे।

आस्था का केन्द्र है यह मन्दिर

बाबा हरभजन सिंह का मंदिर स्थानीय लोगों और सेना के जवानों की आस्था का केन्द्र है। इस इलाके में आने वाला प्रत्येक सैनिक बाबा का प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लेता है। स्थानीय लोग मानते हैं कि अगर एक बोतल में पानी भरकर यहां रख दिया जाए तो इसमें औषधीय गुण आ जाते हैं।

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