महात्मा गांधी की हत्या के पीछे ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी का हाथ!

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Updated on 8 Oct, 2017 at 8:46 pm

क्या महात्मा गांधी का हत्यारा कोई दूसरा भी था? मुंबई के डॉ. पंकज फडनीस ने कई बिंदुओं के आधार पर महात्मा गांधी की हत्या की दोबारा जांच कराने के लिए याचिका दायर की हुई है।

आधुनिक ‘अभिनव भारत’ के संस्थापक और रिसर्चर डॉ. पंकज फडनीस का मानना है कि इस मामले में बहुत कुछ छुपाया गया है। उनका कहना है कि साल 1966 में गठित न्यायमूर्ति जे एल कपूर जांच आयोग, महात्मा गान्धी की हत्या की पूरी साजिश का पर्दाफाश करने में चूक गया था।

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डॉ. पंकज फडनीस TOI

अपनी याचिका में फडनीस ने ‘तीन बुलेट सिद्धांत’ पर सवाल खड़े किए हैं, जिसके आधार पर विभिन्न न्यायालयों ने आरोपियों को दोषी ठहराया था। इस हत्या में नाथूराम गोडसे और नारायण आप्टे को 15 नवंबर, 1949 को फांसी पर लटका दिया गया था और विनायक दामोदर सावरकर को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था।

याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि गांधी पर गोली चलाने वाला गोडसे के अलावा कोई अन्य व्यक्ति भी था, जिसके बारे में जानने के लिए इस केस की दोबारा सुनवाई जरूरी है।

जैसा की हम जानते हैं कि नाथूराम विनायक गोडसे ने महात्मा गांधी की 30 जनवरी, 1948 को नई दिल्ली में बहुत नजदीक से गोली मारकर हत्या कर दी थी। पुलिस जांच में सामने आया था कि गांधी पर तीन गोलियां चलाई गई थीं। पंकज फडनीस ने इसी पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि वहां उस वक्त कोई और भी मौजूद था, जिसने गांधी पर चौथी गोली चलाई थी।

महात्मा गांधी की हत्या पर 20 से ज्यादा सालों तक रिसर्च करने वाले फडनीस ने अंग्रेजी अखबार TOI से बातचित में यह भी दावा किया है कि उनके पास इस मामले से सबंधित जो भी सबूत हैं वो फोर्स 136 (द्वितीय विश्व युद्ध में हिस्सा लेनेवाली ब्रिटेन की एक यूनिट) के भी हत्या में शामिल होने की ओर इशारा करते हैं। उनका कहना है कि यह इतिहास की सबसे बड़ी लीपापोती है।

तो क्या चौथी गोली भी थी, जिसे नाथूराम गोडसे के अलावा किसी और ने चलाया था?

फडनीस कहते हैं कि उनका शोध और उन दिनों की खबरें बताती हैं कि गांधी को चार गोलियां मारी गई थीं। गोडसे ने 30 जनवरी 1948 को जिस पिस्तौल से महात्मा गांधी को गोली मारी थी, उसमें सात गोलियों की जगह थी और बाकी की चार बिना चली गोलियां पुलिस ने बरामद की थीं। ऐसे में यह तय है कि उस पिस्तौल से सिर्फ तीन गोलियां ही चलीं। उन्होंने याचिका में कहा कि ऐसे में गोडसे की पिस्तौल से चौथी गोली चले होने की कोई संभावना नहीं है।यह दूसरे हत्यारे की बंदूक से आई।



फडनीस की इस जनहित याचिका को मुंबई हाईकोर्ट खारिज कर चुका है, जिसे उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट का कहना था कि इस केस से संबंधित सभी तथ्य निचली अदालत में रिकॉर्ड हो चुके हैं और सुप्रीम कोर्ट तक उनकी जांच हो चुकी है।

अब इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। महात्मा गांधी की हत्या की दोबारा जांच के लिये दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कुछ सवाल खड़े किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बहुत साल पहले सुनाए गए इस फैसले में कानूनी आधार पर कुछ नहीं किया जा सकता है। इसके साथ अदालत ने यह भी पूछा कि क्या इस मामले को दोबारा खोलना कानूनन सही और समझदारी भरा कदम होगा। इन सवालों के जवाब खोजने के लिये कोर्ट ने पूर्व सॉलिसिटर जनरल और वरिष्ठ वकील अमरेंदर सरन को कोर्ट की सहायता के लिये एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है।

याचिकाकर्ता को लॉ ऑफ लिमिटेशन के तहत किसी मामले को अदालत में चुनौती देने की समय-सीमा के बारे में भी बताया। फडनीस ने इस पर कहा कि वह इस कानून के बारे में जानते हैं। इस केस में दोषी ठहराए गए लोगों ने फैसले के खिलाफ 1948 में ईस्ट पंजाब हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे खारिज कर दिया गया था। इसके बाद मामला प्रिवी काउंसिल में गया जिसने उसे यह कहकर लौटा दिया कि स्वतंत्र भारत का सुप्रीम कोर्ट 1950 में अस्तित्व में आ जाएगा। बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट ने कभी इस मामले की सुनवाई नहीं की।

उनका कहना है कि अभी भी कुछ ऐसा जो साफ़ नहीं है। सच्चाई का पता लगाने के लिए केस को दोबारा खोला जाना जरूरी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।

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