महात्मा गांधी के भेजे खतों को हिटलर ने कभी पढ़ा ही नहीं, वजह हैरान करने वाली

Updated on 2 Oct, 2018 at 3:23 pm

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साल 1915 में एक भारतीय वकील ने दक्षिण अफ्रीका के अपने बने बनाए करियर को त्याग स्वदेश वापस लौटने का फैसला किया। उस वक्त यह व्यक्ति ना तो महात्मा था और न ही बापू। लेकिन देखते ही देखते वह भारत की आज़ादी के नायक के रूप में उभरा। ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का नेतृत्व करने वाले इस शख्स का नाम था मोहनदास करमचंद गांधी।

 

 


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जिस वक्त भारत में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी अहिंसा के मार्ग पर चलकर आज़ाद भारत की तस्वीर उकेर रहे थे, ठीक उसी दौरान जर्मनी में नाज़ीवाद का उदय हो रहा था। यह विचारधारा जर्मन तानाशाह एडोल्फ हिटलर की थी, जिसके तहत सरकार और आम जन के बीच एक नया सा रिश्ता बनाया जा रहा था।

 

हिटलर ने गांधी जी के पत्र का जवाब क्यों नही दिया- Why Hitler Never Replied To Gandhi's Letter

 

गांंधी और एडोल्फ हिटलर दोनों ही अपने समय की प्रख्यात शख्सियतें थीं। हालांकि, दोनों की विचारधाराओं में ज़मीन आसमान का फर्क था।

 

एक ने अहिंसा के प्रतीक के रूप में ख्याति प्राप्त की तो दूसरे को लोगों ने युद्ध और नरसंहार के लिए जाना। आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 68वीं पुण्यतिथि पर हम उनके जीवन से जुड़ी एक ऐसी बात आपको बताने जा रहे हैं जो इतिहास की तस्वीर बदल सकती थी।

 



हिटलर ने गांधी जी के पत्र का जवाब क्यों नही दिया- Why Hitler Never Replied To Gandhi's Letter

 

दरअसल, द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दुनियाभर में भारी विनाश हुआ था। कई देशों के बीच छिड़े इस युद्द का असर पूरे विश्व पर पड़ा। इस दौरान दुनिया में हो रहे नरसंहार को रोकने के लिए गांधी जी ने हिटलर को दो खत लिखे थे।

गांधी जी ने अपने पत्र में हिटलर का संबोधन एक मित्र के तौर पर किया। इसमें उन्होंने हिटलर को अंहिसा के मार्ग पर चलकर दूश्मनों के आगे दोस्ती का हाथ बढ़ाने का सुझाव दिया। गांधी जी ने 1939 से 1940 के दौरान हिटलर को कई खत लिखे, जिसमें उन्होंने हिटलर को यूरोप के खिलाफ़ जंग न छेड़ने की सलाह दी। मगर दुर्भाग्यवश यह खत कभी हिटलर तक पहुंचा ही नहीं। हिटलर ने गांधी द्वारा भेजे गए पत्रों का कोई जवाब नहीं दिया, क्योंकि उस तक कभी यह खत पहुंचे ही नहीं।

 

हिटलर ने गांधी जी के पत्र का जवाब क्यों नही दिया- Why Hitler Never Replied To Gandhi's Letter

 

आप इस बात को समझ सकते हैं कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश शासित देश भारत से जर्मनी तक खत पहुंचाना आखिर कितना मुश्किल रहा होगा। इतिहासकार भी यह बात मानते हैं कि गांधी जी द्वारा भेजे गए ये खत ब्रिटिशर्स ने रोक लिए थे।

जरा सोचिए कि अगर गांधी जी के भेजे खत हिटलर ने पढ़ लिए होते तो आज इतिहास कुछ और ही कहानी बयां करता।


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