प्रख्यात लेखिका महाश्वेता देवी का निधन, साहित्य जगत में शोक की लहर

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Updated on 28 Jul, 2016 at 5:15 pm

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प्रख्यात लेखिका महाश्वेता देवी का गुरुवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। 90 वर्षीया वरिष्ठ लेखिका को पिछले कई दिनों से जीवन रक्षक प्रणालियों के सहारे रखा गया था।

महाश्वेता पिछले करीब साल भर से बीमार चल रहीं थीं। उन्हें पद्मविभूषण, साहित्य अकादमी, बंगविभूषण और मैगसेसे पुरस्कार से भी नवाजा गया था।

हजार चौरासी की मां उपन्यास से चर्चित महाश्वेता का जन्म अविभाजित भारत के ढाका में 14 जनवरी 1926 को हुआ था। उनके पिता मनीष घटक कवि और उपन्यासकार थे, जबकि माता एक लेखिका और सामाजिक कार्यकर्ता थीं। विभाजन के बाद उनका परिवार पश्चिम बंगाल में आकर बस गया।

महाश्वेता सिर्फ ने कलकत्ता विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की थी। इसके बाद उन्होंने इसी विश्वविद्यालय में एक प्रोफेसर के रूप में काम किया।

लेखन में बचपन से ही रुचि रखने वाली महाश्वेता के पहले उपन्यास का नाम था, ‘झांसी की रानी’। उनका दूसरा उपन्यास ‘नाती’ वर्ष 1957 में प्रकाशित हुआ था। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक कालजयी रचनाएं कीं, जिनमें ‘अग्निगर्भ, ‘जंगल के दावेदार, ‘1084 की मां’ आदि प्रमुख हैं।

महाश्वेता की 20 से अधिक कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुकी हैं और सौ से अधिक उपन्यास बांग्ला भाषा में प्रकाशित हो चुके हैं।

महाश्वेता देवी के निधन से साहित्य, राजनीतिक व सामाजिक जगत में शोक की लहर दौर गई है।


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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने महाश्वेता के निधन को साहित्य जगत की अपूरणीय क्षति बताया है।

कोलकाता के मेयर शोभन चटर्जी, युवा कल्याण मामलों के मंत्री अरुप विश्वास और इंद्रनील चौधरी मृत्यु की खबर सुनकर दक्षिण कोलकाता के बेलव्यू अस्पताल पहुंच गए हैं।

इसी अस्पताल में महाश्वेता का इलाज चल रहा था।

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