खुले में शौच से मुक्त घोषित हुए इस गांव में कभी बने ही नहीं शौचालय, सामने आया बड़ा घोटाला

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Updated on 2 Sep, 2017 at 7:26 pm

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कुछ महीने पहले ही मुंबई को खुले में शौच से मुक्ति का ‘सर्टिफिकेट’ दिया गया। इसका मतलब हुआ कि यहां पर लोग बाहर शौच के लिए नहीं जाते हैं। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस ने ट्वीट करके ये जानकारी दी थी, लेकिन लगातार फडनवीस सरकार के दावों की पोल खुली है। कई जगहों पर न केवल शौचालयों की कमी है, बल्कि इनका रख-रखाव भी ठीक ढंग से नहीं किया जा रहा है।

वहीं, अब शौचालयों के निर्माण में घोटाले की खबर भी सामने आई है।

सरकारी दस्तावजों के मुताबिक, महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले के पाटण गांव में सभी घरों में 112 शौचालय बनाए गए, जिसके तहत गांव को खुले में शौच से मुक्त करार दिया गया। और तो और गांव को आनन-फानन में पुरस्कार भी दिए गए। लेकिन यहां जमीनी हकीकत कुछ और ही है।

दरअसल, सच्चाई तो ये है कि इस गांव में कभी शौचालय बने ही नहीं। आज तक की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रामीण आज भी यहां खुले में शौच करने को मजबूर हैं। कागजों पर शौचालय बना कर लाखों रुपए की लूट को अंजाम दिया गया।



इस धांधली का पता उस वक्त चला जब गांव की महिलाएं ग्राम पंचायत के कार्यालय जाकर शौचालय बनाने की मांग करने पहुंची। तब पता चला कि इनके घरों में पहले से ही शौचालयों का निर्माण करा दिया गया है और इन्हें मिलने वाली अनुदानित राशि भी दे दी गई है। तब ग्रामीणों ने खुलासा किया कि उन्हें शौचालय निर्माण के लिए जो राशि मिलनी थी वो अभी तक उन्हें दी ही नहीं गई है। शौचालय बनाने के नाम पर सिर्फ गड्ढे ही खोदे गए हैं। गांव वालों ने अपने साथ हुई इस धोखाधड़ी की शिकायत पुलिस में दर्ज करा दी है।

अब सवाल उठता है कि क्या कागजों पर शौचालय बनवाने की कार्रवाई भर से ही, खुले में शौच से देश को मुक्ति मिल जाएगी?

सफाई अभियान की धज्जियां उड़ाने के लिए बिचौलिए बैठे हुए हैं। अब जरूरत है कि कड़े कदम उठाए जाए। कागजी कार्रवाई हकीकत में तब्दील हो भी रही है या नहीं, ये सुनिश्चित करना भी सरकार की जिम्मेदारी है।


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