विरोध प्रदर्शन के लिए सड़कों पर हजारों लीटर दूध का बहाया जाना कहां तक उचित है ?

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Updated on 1 Jun, 2017 at 5:28 pm

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महाराष्ट्र के किसान राज्य सरकार से कर्जमाफी की मांग कर रहे हैं। बुधवार को महाराष्ट्र सरकार के साथ इस मुद्दे पर बातचीत के विफल होने पर किसानों ने आज से हड़ताल शुरू कर दी है। फैसला किया गया है कि अब सब्जी और दूध बाजार में नहीं बेचे जाएंगे। प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए किसानों ने अलग-अलग स्थानों पर टैंकरों को रोककर हजारों लीटर दूध सड़कों पर बहा दिया।

यह विडियो शिरडी का है।

अहमदनगर में भी हजारों लीटर दूध सड़कों पर बहाए जाने की खबर है।


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कृषि राज्यमंत्री सदाभाऊ खोत का कहना हैः

“बातचीत के लिए सरकार के दरवाजे खुले हैं। किसान आकर बात कर सकते हैं। बातचीत से ही कोई फैसला हो सकता है।”

अब सवाल यह है कि जब राज्य सरकार बातचीत के लिए तैयार है तब कथित किसानों का यह रवैया कहां तक जायज है। किसान क्रांति जन आंदोलन के सदस्य धनंजय जाधव मानते हैं कि कृषिमंत्री पांडुरंग फुंडकर ने किसानों को चर्चा के लिए दोबारा बुलाया है। हालांकि, उन्होंने कहा है कि वह मुंबई नहीं जाएंगे, क्योंकि वहां जाने के लिए उनके पास पैसे नहीं हैं।

सवाल यह भी उठता है कि जब मुंबई जाने के लिए पैसे नहीं हैं तब सड़कों पर हजारों लीटर दूध बहाने के लिए पैसा कहां प्रायोजित हो रहा है?

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