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…जब महाराणा प्रताप ने काट ली थी मुगल बादशाह अकबर की मूंछ!

Published on 11 July, 2017 at 8:20 pm By

हमारे देश के इतिहास को कई बार तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है। इतिहासकारों ने मुगल बादशाह अकबर को ‘महान’ शासक की उपाधि दी हुई है, लेकिन वही राजपूत शासक महाराणा प्रताप के गौरव और तेज प्रतापी चरित्र को स्वीकार करने में विफल रहे हैं।


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अगर किसी बच्चे से पुछा जाए कि महाराणा प्रताप कौन थे, तो एक ही जवाब मिलेगा, वह जिन्होंने हल्दीघाटी युद्ध लड़ा था। यह भी हो सकता है कि शायद बच्चों को हल्दीघाटी की इस लड़ाई के बारे में भी कुछ पता न हो।

साल 1576 में हुए इस भीषण युद्ध में अकबर को नाको चने चबाने पड़े थे। हालांकि, राजस्थान की धरा पर लड़ा गया यह भीषण युद्ध आज तक बेनतीजा माना जाता रहा है। लेकिन राजस्थान सरकार की ओर से दावा किया गया है कि इस युद्ध में आखिर जीत महाराणा प्रताप की हुई थी। इस दावे के पीछे सरकार ने इतिहासकार डॉ. चन्द्रशेखर शर्मा के शोध का हवाला दिया। डॉ. शर्मा ने अपने शोध सबूतों के साथ प्रताप को हल्दीघाटी युद्ध का विजेता बताया।

अभी भी कई ऐसे हैं जो देश के गौरवान्वित इतिहास के महान हिंदू शासक महाराणा प्रताप से अनजान हैं। यही कारण है कि स्कूलों में इतिहास के पाठ्यक्रम में तथ्यों के आधार पर संशोधन होना आवयशक है। साथ ही आज की नई पीढ़ी को भारत के महान राजाओं की वीर गाथा से अवगत कराया जाना भी जरूरी है।

इतिहास के पन्नों में महाराणा प्रताप से जुड़ी कई महान कहानियां दर्ज हैं। ऐसी ही एक कहानी है जब महाराणा प्रताप ने अकबर की मूंछ काट दी थी।



जब मुगल सेना ने मेवाड़ पर हमला किया, महाराणा प्रताप ने अपनी मातृभूमि को बचाने के लिए उन्हें लड़ाई में चुनौती दी। मुगल सेना राजस्थान में राजसमंद के पास बादशाह मगरी में डेरा डाले हुए थी।

महाराणा प्रताप रात में शिविर स्थल पर पहुंचे और अपने स्वभाव और विचारधारा के प्रति सच्चे, प्रताप ने सोते हुए दुश्मन और उनके सम्राट पर हमला नहीं किया। लेकिन अकबर को यह आभास कराने के लिए कि उनकी सेना डटकर मुकाबला करने के लिए वहीं मौजूद हैं, महाराणा प्रताप ने अकबर की मूंछ काट दी। कहा जाता है अकबर उस वक्त गहरी नींद में सोया था।

महाराणा प्रताप का जन्म राजस्थान में उदयपुर के निकट कुम्भलगढ़ किले में 9 मई 1540 को हुआ था। बहादुर महाराणा, अकबर और उसकी सेना से मुकाबला करने और अपनी मातृभूमि को बचाने के लिए कई वर्षों तक निर्वासित रहे थे। महाराणा प्रताप से जुड़ी राजस्थानी लोककथाओं में उनके वफादार और साहसी घोड़े चेतक का जिक्र है, जो अपनी अन्तिम सांस तक अपने मालिक की रक्षा करता रहा।


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आपको बता दें कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी महाराणा प्रताप को लेकर कहा था कि महाराणा प्रताप का सही मूल्यांकन इतिहासकारों ने नहीं किया। उन्होंने कहा थाः

“वो महाराणा प्रताप ही थे जो आजादी और खुद के सम्मान के लिए वीरता से लड़े। इस लड़ाई में उन्होंने अपना सब कुछ त्याग दिया लेकिन अकबर के आगे हार नहीं मानी। मुझे आश्चर्य है कि कैसे हमारे इतिहासकारों ने अकबर को महान बना दिया जबकि प्रताप को नहीं, उन्हें प्रताप में ऐसी कौन सी कमी नजर आई कि उन्होंने प्रताप को महान नहीं माना।”


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महाराणा प्रताप के योगदान को कतई भी कम नहीं आंका जा सकता। इतिहासकारों को महाराणा प्रताप के योगदान का फिर से मूल्यांकन करने की जरूरत है।

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