महादेवशाल धाम में होती है खंडित शिवलिंग की पूजा

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Updated on 15 Dec, 2015 at 1:28 pm

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भारतीय शास्त्रों में खंडित मूर्ति के पूजन की मनाही है। लेकिन शिवलिंग एक अपवाद है। शिवलिंग खंडित होने की स्थिति में भी पूजनीय होता है। इसका उदाहरण है महादेवशाल धाम मंदिर। जी हां, झारखंड के इस मंदिर में खंडित शिवलिंग की पूजा होता होती है। वह भी सिर्फ कुछ सालों से नहीं, बल्कि पिछले 150 सालों से।

माना जाता है कि इस शिवलिंग की वजह से एक अंग्रेज इन्जीनियर को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। स्थानीय लोग कहते हैं कि वर्षों पहले जब मुम्बई और कोलकाता के बीच रेल लाईन बिछाने का काम चल रहा था तब मजदूरों को खुदाई के दौरान यह शिवलिंग मिला था।

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शिवलिंग मिलने के बाद मजदूरों ने काम रोक दिया और आगे का काम करने से मना कर दिया। इससे गुस्साए ब्रिटिश इन्जीनियर रॉबर्ट हेनरी ने इस शिवलिंग पर प्रहार कर इसके दो टुकड़े कर दिए। माना जाता है कि शाम को घर लौटते वक्त उसकी रास्ते में ही मौत हो गई।

इस घटना के बाद अंग्रेज अधिकारियों ने रेलवे लाईन की दिशा बदल दी और यही वजह है कि उन्हें आगे के रास्ते के लिए दो सुरंगों का निर्माण करना पड़ा था।



खुदाई में जहां शिवलिंग निकला था आज वहां देवशाल मंदिर है तथा खंडित शिवलिंग मंदिर के गर्भगृह में स्थापित है। शिवलिंग का दूसरा टुकड़ा इस स्थान से दो किलोमीटर दूर रतनबुर पहाड़ी पर ग्राम देवी ‘मां पाउडी’ के साथ स्थापित है, जहां दोनों की नित्य पूजा-अर्चना होती है।

परम्परा के अनुसार पहले शिवलिंग और उसके बाद मां पाउडी की पूजा होती है।

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