शरीर पर हो किसी भी तरह की गांठ या फोड़े-फुंसी, अपनाएं ये रामबाण घरेलु उपाय

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Updated on 8 Aug, 2016 at 7:43 pm

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शरीर के किसी भी हिस्से में गांठ होने पर इसे गंभीरता से लेने की जरूरत है। ये गांठ कैंसर और टीबी जैसी बीमारियों के लक्षण हो सकते हैं।  इसलिए जरूरी है कि आप ऐसी गांठों की अनदेखी न करें। ये जरूरी नहीं है कि हर गांठ कैंसर ही हो, लेकिन सावधानी बरतने में भी कोई हर्ज नहीं है। आखिर स्वास्थ्य ही सबसे बहुमूल्य धन है।

किसी भी तरह की गांठ की जांच कराना अत्यंत आव्यशक है, ताकि समय रहते गांठ के बारे में सही जानकारी हो, उसका समय रहते उपचार शुरू हो सके।

गांठों में दर्द न होने के कारण लोग इनका उपचार नहीं करवाते, जिसकी वजह से यह दर्दहीन गांठें भी बाद में असाध्य रूप ले सकती हैं। और फिर इनका उपचार लंबा और विकट हो जाता है।

वहीं, कैंसर की गांठों की बात करे तो उनका इलाज शुरुआती चरण में करना अत्यंत जरूरी होता है। शुरुआती अवस्था में ही इलाज हो जाए तो मरीज के स्वस्थ होने की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

आपके शरीर में चाहे किसी भी किस्म की गांठ हो, यह उपचार रामबाण की तरह कारगर साबित होंगे:

कचनार की छाल और गोरखमुंडी

यह दोनों ही जड़ी बूटी बेचने वाले के पास उपलब्ध होती है। कचनार की पहचान है, सिरे पर से कटा हुआ पत्ता। इसकी शाखा (टहनी) की छाल ले। याद रखे कि आपको शाखा की छाल लेनी है, तने की नहीं। यह छाल 1 इंच से 2 इंच तक मोटी होनी चाहिए। बहुत मोटी या पतली शाखा की छाल न लें। यदि कचनार की छाल ताजी लें तो अधिक लाभदायक है।


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वहीं, गोरखमुंडी का पौधा मिलना मुश्किल होता है, यह आपको किसी जड़ी बूटी बेचने वाले के पास से मिल जाएगा।



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ऐसे प्रयोग में लाए:

  • कचनार की ताजी छाल 25-30 ग्राम (सुखी छाल 15 ग्राम) को मोटा-मोटा कूट ले।
  • इसके बाद 1 गिलास पानी मे इसे उबाले। 2 मिनट तक उबालने के बाद इसमें 1 चम्मच मोटी कुटी या पीसी हुई गोरखमुंडी डाले।
  • इस मिश्रण को 1 मिनट तक उबलने दे और फिर छान ले। हल्का गरम होते ही इसे पी ले।

गांठ कैसी ही हो, प्रोस्टेट बढ़ी हुई हो, जांघ के पास की गांठ हो, काँख की गांठ हो, गले के बाहर की गांठ हो, गर्भाशय की गांठ हो, स्त्री पुरुष के स्तनो मे गांठ हो या टॉन्सिल हो, गले मे थायराइड ग्लैण्ड बढ़ गई हो (Goiter) या LIPOMA (फैट की गांठ) हो फायदा जरूर करती है।

इस मिश्रण को दिन मे 2 बार ले। लंबे समय तक लेने से ही यह फायदा पहुंचाएगा। अगर आप यह सोचते है कि यह घरेलु दवा तुरंत अपना असर दिखाना शुरू कर देगी, तो उसके लिए आपको थोड़ा सब्र रखना होगा। 20-25 दिन तक कोई फायदा नहीं होगा जिससे निराश होकर बीच मे न छोड़े।

आकड़े के दूध में मिट्टी भिगोकर लेप करने से तथा निर्गुण्डी के 20 से 50 मि.ली. काढ़े में 1 से 5 मि.ली अरण्डी का तेल डालकर, इसका सेवन करने से भी फायदा होता है।

गेहूँ के आटे में पापड़खार तथा पानी डालकर पुल्टिस बनाकर लगाने से न पकने वाली गांठ पककर फूट जाती है तथा दर्द कम हो जाता है।

फोड़े फुन्सी होने पर अपनाए ये उपाय

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  • आम की गुठली या नीम या अनार के पत्तों को पानी में पीसकर लगाने से फोड़े-फुन्सी में लाभ होता है।
  • एक चुटकी काले जीरे को मक्खन के साथ सेवन करने से भी फायदा होता है।
  • सुहागे को पीसकर लगाने से रक्त बहना तुरंत बंद होता है तथा घाव शीघ्र भरता है।
  • पीठ का फोड़ा होने पर गेहूँ के आटे में नमक तथा पानी डालकर गर्म करके पुल्टिस बनाकर लगाने से फोड़ा पककर फूट जाता है।
  • अरण्डी के तेल में आम के पत्तों की राख मिलाकर लगाना भी लाभदायक होगा।

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