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 मौत को एक नहीं कई बार मात दे चुके हैं दुनिया के ये 5 भाग्यशाली लोग

Published on 25 August, 2018 at 10:45 am By

मृत्यु अटल सत्य है जिसे कोई बदल नही सकता, लेकिन दुनिया में कुछ ऐसे लोग भी हुए हैं जो कई बार मौत के मुंह में जाकर वापस आ चुके हैं। अब ये उनकी खुशकिस्मती है या कुदरत का करिश्मा ये तो पता नहीं, लेकिन बार-बार मौत के मुंह से बचकर आना आसान नहीं है। चलिए आपको मिलवाते हैं दुनिया के कुछ ऐसे ही खुशनसीब इंसानों से जो बार-बार मौत को चकमा दे चुके हैं।


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इनका बचे रहना कुदरत का करिश्मा है।

 

1. फ्रैन सेलाक

 

 

क्रोएशिया के रहने वाले फ्रैन रियाटर म्यूज़िक टीचर हैं। हालांकि, उन्हें दुनिया का सबसे खुशनसीब इंसान कहा जाए तो गलत नहीं होगा, क्योंकि वो एक-दो बार नहीं, बल्कि सात बार मौत को चकमा दे चुके हैं। साल 2003 में उन्होंने 7 करोड़ की लौटरी भी जीती। पहली बार मौत उन्हें छूकर गुज़री थी, वो 1962 का समय था। फ्रैन जिस ट्रेन से सफर कर रहे थे वो एक बर्फीली नदी में गिर गई, इस हादसे में 17 लोगों की मौत हो गई थी, लेकिन फ्रैन बच गए। हालांकि, वो हीपोथेरमिया के शिकार हो गए। इसके कुछ साल बाद वो जिस फ्लाइट के जा रहे थे वो क्रैश हो गई और इसमें 19 लोग मारे गए। फ्रैन फिर बच गए और वो घास के बंडल पर जा गिरे। तीसरी बार वो जिस बस से सफर कर रहे थे, वो नदी में गिर गई। इस हादसे में चार लोग डूब गए, लेकिन फ्रैन बच गए। इसके बाद वो जिस कार को चला रहे थे, उसमें आग लग गई। एक बार उनकी कार पहाड़ियों पर एक ट्रक से जा भिड़ी और वो किसी तरह कार से बाहर निकल गए, जिसके बाद कार खाई में गिर गई। इसके बाद फ्रैन ने सोचा कि अब उनके लिए पैदल यात्रा करना ही ठीक है, लेकिन वो गलत थे, क्योंकि एक बार फिर मौत से उनका सामना हुए और बस ने उन्हें टक्कर मार दी, जिसमें उन्हें मामूली चोट लगी थी। आज वो अपनी चौथी पत्नी के साथ रहते हैं।


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2. पीटर फ्रुचेन

 

 

पीटर जब 20 साल के थे और डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे थे, तभी अपने एक दोस्त के साथ आर्कटिक की यात्रा पर निकल गए और जितना हो सका, उत्तर की ओर बढ़ते गए। वो काफी आगे निकल गए और इनयूट संस्कृति (एस्किमो) से मिले। उसने इनयूट महिला से शादी की और वहां रहते हुए भालू और भेड़िये के शिकार किए। एक बार वो बर्फ के कोकून में ज़िंदा दफन हो गए। कोई और होता तो कब का मर चुका होता, लेकिन पीटर नहीं मरे। उन्होंने खुद को बचाने के लिए अपने ही जमे हुए मल से एक चाकू बनाया और 30 घंटे तक बर्फ को काटकर खुद को बचा लिया।

पीटर ने 30 किताबें और ऑस्कर विजेता फिल्म की स्क्रिप्ट भी लिखी है, जिसमें वो खुद विलेन बने थे। इसके बाद पीटर जर्मनी के खिलाफ डैनिश प्रतिशोध में शामिल हो गए। वो यहूदी थे इसलिए जब नाज़ियों ने डेनमार्क पर कब्ज़ा किया तो पीटर को मौत की सजा सुनाई गई, लेकिन वो किसी तरह बच निकले और स्वीडन पहुंच गए। अपनी अंतिम किताब लिखने के तीन दिन के बाद 1957 में हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई।

 

3. वायलेट जेसॉप

 

 



वायलेट ने मौत को पहली बार तब चकमा दिया जब वो बच्ची थी और ट्यूबरोक्लोसिस का शिकार हुई थीं। डॉक्टरों ने कहा था कि वो सिर्फ कुछ महीने ही जीवित रहेंगी, लेकिन उन्होंने बीमारी को मात दे दी और पूरी तरह से ठीक हो गईँ। वायलेट के पिता नहीं थे तो उनकी मां ही परिवार का खर्च चलाने के लिए नौकरी करती थीं। कुछ समय बात जब मां बीमार हो गई तो वायलेट ने उनकी नौकरी (जहाज में खाना देने का काम) कर ली, उस वक्त वो 21 साल की थीं।

वायलेट जिस जहाज पर नौकरी करती थी वो एक बार दूसरी जहाज से टकरा गई जिससे जहाज को बहुत नुकसान हुआ, मगर वो डूबने से बच गई। 1912 में जब टाईटैनिक डूबा था तब वो उनकी क्रू मेंबर में से एक थी, लेकिन वो लाइफबोट में निकल गई जिससे उनकी जान बच गई। इसके बाद उन्होंने ब्रिटैनिक शिप पर बतौर नर्स नौकरी शुरू की, लेकिन उसी दौरान शिप में जोरदार धमाका हुआ, जहाज डूबने लगा ऐसे में वायलेट को जहाज से कूदकर अपनी जान बचानी पड़ी।

1971 में 84 साल की उम्र में वायलेट की मौत हार्ट अटैक से हुई।

 

4. सुटोमु यामागुची

 

 

युवा इंजीनियर यामागुची अपने नियोक्ता के कहने पर बिज़नेस डील के लिए 6 अगस्त 1945 को हीरोशिमा पहुंचे थे। यही वो समय था जब दुनिया दूसरे विश्व युद्ध के दौर से गुज़र रही थी। इसी समय, अमेरिका ने जापान के इस शहर पर घातक परमाणु बम ‘लीटिल बॉय’ गिराया था। जिस जगह पर बम गिरा यामागुची उससे सिर्फ 3 किलोमीटर दूर थे, बम के असर से उनके कान का परदा फट गया और कुछ समय के लिए उनकी आंखों की रोशनी भी चली गई, लेकिन मौत के इतने करीब आने के बाद भी उनकी जान बच गई।

अगले दिन ही उन्होंने शहर छोड़ने का निश्चय किया और ट्रेन से अपने घर नागासाकी पहुंच गए। वहां इलाज के बाद 9 अगस्त को ऑफिस पहुंचे। सुबह के 11 बजे जब वो ऑफिस में बॉस को अपनी आपबीती सुना रहे थे, तभी उन्हें वैसे ही सफेद रोशनी और धमाका सुनाई दिया जैसा कि हीरोशिमा में। दरअसल, हीरोशिमा के बाद अमेरिका का अगला निशाना नागासाकी था जहां उसने ‘फैटमैन’ नामक बम गिराया था। इस हमले में करीब 70 हजार लोग मारे गएं, मगर यामागुची मौत से फिर 3 किलोमीटर दूर थे।

2009 में यामागुची जापान के दोनों शहरों पर हुए हमलों के एकमात्र सरवाइवर थे। इसके एक साल बाद ही 93 साल की उम्र में किडनी और लिवर कैंसर से उनकी मौत हो गई।

 

5. एड्रियन कार्टन डी वाइर्ट

 

 

लेफ्टिनेंट जनरल एड्रियन कार्टन डी वाइर्ट भी उन खुशनसीबों में से है जिन्होंने कई बार मौत को मात दी। उन्हें लड़ाई लड़ने का बहुत शौक था, इसलिए 20 साल की उम्र में पिता की मर्जी के खिलाफ पढ़ाई छोड़कर उन्होंने सेना में नौकरी कर ली। उनकी पहली बड़ी लड़ाई थी द्वितिय बोअर युद्ध, इस युद्ध के दौरान उन्हें कई जगह गोली लगी, मगर फिर भी वो बच गए और इंग्लैंड वापस आ गए।

पहले विश्व युद्ध के समय वो सोमालिया में ग्रेट ब्रिटेन की तरफ से लड़ रहे थे, इस दौरान लड़ाई में घायल होने की वजह से उनकी एक आंख की रोशनी चली गई। इसके बाद वो पश्चिमी मोर्चे पर चले गए और यहां उन्हें पसली, सिर, टखने, हिप और कान में गोली लगी, मगर इस बार भी उनकी जान बच गई।


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दूसरे विश्व युद्ध के समय जब वो विमान से युगोस्लाविया जा रहे थे तो बीच में ही विमान बंद हो गया और समुद्र में गिर गया, लेकिन इस बार भी वो तैरकर बच गए। हालांकि, इटली में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। दो दिन बाद वो वहां से फरार हो गए, लेकिन 8 दिन बाद फिर गिरफ्तार कर लिए गए। इटली और ब्रिटेन में हुए समझौते के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। इसे कुदरत का करिश्मा कहना चाहिेए।

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