Topyaps Logo

Topyaps Logo Topyaps Logo Topyaps Logo Topyaps Logo

Topyaps menu

Responsive image

यहां भगवान शिव के अंगुष्ठ की होती है पूजा; शिवलिंग नहीं है मौजूद

Updated on 27 February, 2016 at 1:38 pm By

दुनिया के हर कोने में स्वयंभू परमपिता परमात्मा शिव को उनके साक्षात प्रतिरूप ‘शिवलिंग’ के रूप में पूजा जाता है, लेकिन महादेव का एक ऐसा धाम भी मौजूद है, जहां उनकी प्रतिमा या शिवलिंग का नहीं, बल्कि उनके चरणों के अंगूठों का पूजन किया जाता है।


Advertisement

यह प्राचीन शिव मंदिर राजस्थान के एकमात्र पर्वतीय नगर माउंट आबू के उत्तर में स्थित अचलगढ़ की पहाड़ियों पर स्थित है। इन पहाड़ियों के नाम पर ही यहां भोलेनाथ को ‘अचलेश्वर’ महादेव के नाम से जाना जाता है। ऐसा माना जाता है की आबू पर्वत का अस्तित्व अचलेश्वर महादेव के अंगुष्ठ के कारण बना हुआ है।

मंदिर के नीचे है रहस्यमयी प्राकृतिक गुफा

मंदिर परिसर के गर्भगृह के अंदर जहां शिव के अंगूठों के निशान हैं, से ठीक नीचे की तरफ एक प्राकृतिक खाई है, जहां शिव को चढ़ाया जाने वाला जल गिरता है। यह खड्ढा जितना मनोहारी है, उससे कहीं अधिक रहस्यमयी है। किसी को भी नहीं पता की इसमें जाने वाला जल आखिर कहां जाता है। इससे भी बड़ी बात, इसमें कितना भी जल डाल दिया जाए यह कभी भी पूर्णतया नहीं भरता।

आख्यानों के मुताबिक़ यह महादेव के दाहिने पैर का अँगूठा है, जिसके भीतर विराट ब्रह्म खाई है और इसी ब्रह्म खाई को ही पाटने के लिए हिमालय पुत्र नंदी वद्रधन ने आबू पर्वत का स्वरूप लिया।

शिव के अंगूठे ने थामा आबू पर्वत



इस विशाल खाई के निचले तट पर कई मन्वंतर पूर्व सप्तऋषियों में शुमार वशिष्ठजी तपस्या करते थे। यह ब्रह्म खाई कई बार उन्हें और उनकी कामधेनू सहित कई प्राणियों के प्राणों को संकट में डाल चुकी थी। जिसके कारण वशिष्ठ जी ने हिमालय से विनती कर उनके पुत्र नंदी वद्र्धन को विराट ब्रह्म खाई को पाटने के लिए आमंत्रित किया।

स्कंद पुराण के अनुसार यह खाई इतनी गहरी थी की इसमें पूरा नंदी नखों सहित समा गया। फिर भी खाई में वह स्थिर नहीं रह पा रहा था। तब ऋषियों के निवेदन पर महादेव ने अपने दाँयें पैर के अँगूठे को लगाकर नदी वद्रधन (माउंट आबू) को अचल किया। इसी कारण इस स्थल का नाम अचलगढ़ पड़ गया।

पंचधातु के नंदी है प्रमुख आकर्षण

अचलेश्वर महादेव मंदिर में भगवान् शिव के अंगूठे के निशान के अलावा नंदी की पांच धातु द्वारा निर्मित प्रतिमा खासी आकर्षक है। मंदिर के बाहर बनाया हुआ द्वारिकाधीश देवालय भी काफी सुन्दर और आकर्षक है। मंदिर के गर्भगृह के बाहरी कोने पर जगतपालक विष्णु के सभी अवतारों की झांकियां हैं। आबू वासियों की माने तो धौलपुर के पुराने रजवाड़े राज्याभिषेक से पूर्व इसी मंदिर के बाईं ओर बने हुए धर्मकांटे के नीचे अपने कर्तव्यों की शपथ लेते थे। यहां पास में ही परमार राजाओं द्वारा बनवाया गया, विशाल किला है जिसे अचलगढ़ का किला कहा जाता है।


Advertisement

हालांकि, अब यह सिर्फ एक खंडहर है। शिव के आशीष और सप्तऋषियों की तपोभूमि होने के कारण यह क्षेत्र जीवनदायी वनस्पतियों और अध्यात्मिक तपस्थली के रूप में संसार भर में प्रसिद्ध है।

Advertisement

नई कहानियां

नेहा कक्कड़ के ये बेहतरीन गाने हर मूड को सूट करते हैं

नेहा कक्कड़ के ये बेहतरीन गाने हर मूड को सूट करते हैं


मलिंगा के इस नो बॉल को लेकर ट्विटर पर बवाल, अंपायर से हुई गलती से बड़ी मिस्टेक

मलिंगा के इस नो बॉल को लेकर ट्विटर पर बवाल, अंपायर से हुई गलती से बड़ी मिस्टेक


PUBG पर लगाम लगाने की तैयारी, सिर्फ़ इतने घंटे ही खेल पाएंगे ये गेम!

PUBG पर लगाम लगाने की तैयारी, सिर्फ़ इतने घंटे ही खेल पाएंगे ये गेम!


अश्विन-बटलर विवाद पर राहुल द्रविड़ ने अपना बयान दिया है, क्या आप उनसे सहमत हैं?

अश्विन-बटलर विवाद पर राहुल द्रविड़ ने अपना बयान दिया है, क्या आप उनसे सहमत हैं?


आधार कार्ड कैसे होता है डाउनलोड? यहां जानें इसका आसान प्रोसेस

आधार कार्ड कैसे होता है डाउनलोड? यहां जानें इसका आसान प्रोसेस


Advertisement

ज़्यादा खोजी गई

टॉप पोस्ट

और पढ़ें Culture

नेट पर पॉप्युलर