सावन के महीने में शिवलिंग की यह विशेष पूजा करने से दूर हो जाएंगे आपके सारे दुःख

Updated on 9 Aug, 2018 at 4:43 pm

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सभी देवों में शिव ही ऐसे देव हैं, जो भक्तों से जल्द प्रसन्न हो जाते हैं। देवों के देव महादेव को पापों का नाश करने वाला देव कहा जाता है। शिव पूजन से मन के समस्त दुःख दूर हो जाते हैं। श्रावण मास में शिव की आराधना का विशेष महत्व है, इसलिए इस माह में पार्थिव लिंग बनाकर शिव पूजन करना फलदायी होता है। आदि और अंत न होने से लिंग को ही शिव का निराकार रूप माना गया है। इसलिए भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए इस माह में पार्थिव शिवलिंग की आराधना की जाती है।

 

कलियुग में पार्थिव लिंग पूजन का विशेष महत्व है। इसका पूजन करने वालों पर सदैव शिवजी की कृपा बना रहती है। शिव का पूजन करने से पहले पार्थिव लिंग का निर्माण करना चाहिए। इसके लिए मिट्टी, गाय का गोबर, गुड़, मक्खन, और भस्म मिलाकर शिवलिंग बनाना चाहिए।

 


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शिवलिंग का निर्माण करते समय इस बात का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए कि ये 12 अंगुल से ऊंचा न हो। इससे अधिक ऊंचा होने पर पार्थिव लिंग पूजन का पुण्य प्राप्त नहीं होता। शिव जी को चढ़ाई जाने वाली पूजन सामग्री में दूध, दही, शहद भांग, धतूरा, गंगाजल, कमल आदि का अर्पण किया जाता है। पार्थिव लिंग बनाने के बाद उसे परम ब्रह्म मानकर पूजें और ध्यान करें।

 

 

पार्थिव लिंग बनाकर विधिवत पूजा करने से इस लोक में यश और वैभव प्राप्त करने के साथ ही मृत्यु उपरांत मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। साथ ही भक्त दस हजार कल्प तक स्वर्ग में निवास करता है। शिवपुराण के अनुसार पार्थिव पूजन से धन-धान्य, आरोग्य और पुत्र की प्राप्ति भी होती है।

 

 

कलियुग में सबसे पहले पार्थिव पूजन कुष्मांड ऋषि के पुत्र मंडप ने किया था। प्रभु के आदेश पर जगत के कल्याण के लिए उन्होंने पार्थिव लिंग बनाकर शिव की आराधना की थी। रावण के साथ युद्ध करने से पहले भगवान राम ने भी पार्थिव शिवलिंग का पूजन किया था, जिसके बाद उन्होंन रावण को परास्त कर लंका पर विजय प्राप्त की थी।

 

 


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