क्या आप जानते हैं भगवान शिव की एक बहन भी थी ‘देवी असावरी’?

Updated on 10 Nov, 2017 at 3:26 pm

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ब्रह्मा, विष्णु और महेश इन्ही त्रिदेवों ने सृष्टि की रचना की और उसे चला भी रहे हैं। इन त्रिदेवों के बारे में आपने भी कई पौराणिक कथाएं सुनी होंगी, लेकिन क्या आपने भगवान शिव की बहन के बारे में सुना है? शायद ही किसी को पता होगा कि शिव जी की एक बहन भी थी, लेकिन उसे शिव जी ने ही बनाया था।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार पार्वती जी जब शादी के बाद भगवान शिव के साथ कैलाश पर्वत आ गई, तो वहां उन्हें अपने परिवार और सहेलियों की बहुत याद आती थी। हालांकि, भगवान शिव का प्रिय नंदी पार्वती जी का पूरा ख्याल रखता था। फिर भी पार्वती जी बहुत अकेली महसूस करती थीं, क्योंकि कैलाश पर उनके अलावा और कोई स्त्री नहीं थी। ऐसे में एक दिन पार्वती जी के मन में ख्याल आया कि यदि भोलेनाथ की कोई बहन होती तो कितना अच्छा होता। वह उसके साथ दिल बहलाती, उससे अपने मन की सारी बाते बतातीं। सर्वज्ञाता भोलेनाथ ने पार्वती जी के मन की बात जान ली और वो अपनी बहन को लाने को तैयार भी हो गए, लेकिन एक शर्त पर की पार्वती जी को उनका पूरा ख्याल रखना होगा। माता पार्वती मान गईं।

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फिर शिव जी ने अपनी माया से देवी असावरी की रचना की, जो देखने में बहुत अजीब थी। वो बहुत मोटी थीं और उनके बदन पर ढंग के कपड़े भी नहीं थे। पैरों में दरारे थीं, लेकिन पार्वती जी अपनी ननद को देखकर बहुत खुश हुईं। ननद की खातिरदारी के लिए उन्होंने अपने हाथों से भोजन बनाया और उन्हें परोसा, लेकिन ननद की भूख तब तक शांत नहीं हुई जब तक पूरा भोजन खत्म नहीं हो गया। यह देखकर पार्वती जी को बुरा लगा, लेकिन उन्होंने कुछ कहा नहीं।



फिर उन्होंने ननद को नए कपड़े दिए, लेकिन देवी असावरी इतनी मोटी थी कि उन्हें वो कपड़े आए ही नहीं। पार्वती जी भोलेनाथ के पास उनकी इस अजीब बहन के बारे में बात करने ही जा रही थीं कि देवी असावरी ने मज़ाक स्वरूप पार्वती जी को अपने पैरों की दरारों में छुपा लिया। जब शिव जी ने देवी असावरी से पार्वती के बारे में पूछा तो उन्होंने जोर से पैर पटका और पार्वती जी बाहर गिर पड़ीं।

इस वाक़ये के बाद माता पार्वती ने शिव जी से कहा कि वह अपनी बहन को वापस भेज दें, उनसे ग़लती हो गई जो उन्होंने ननद के साथ की इच्छा प्रकट की। इसके बाद शिव जी ने देवी असावरी को वापस भेज दिया।


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