40 हजार साल पुरानी यह प्रतिमा भगवान नरसिंह की है

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Updated on 28 Jan, 2017 at 10:58 am

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सनातन धर्म को दुनिया का सबसे प्राचीन धर्म कहा जाता है। सनातन की परंपरा हजारों सालों से चली आ रही है। इसके प्रमाण भी मौजूद हैं। जर्मनी के पुरातत्व विभाग में एक मूर्ति रखी हुई है, जो करीब 40 हजार साल पुरानी है। इस मूर्ति की खासियत यह है कि इसका सिर शेर का है और धड़ इन्सान का। साथ ही न तो यह नर दिख रहा है और न ही मादा।

वर्ष 1939 में जर्मनी के होलेन्स्टीन स्टैडल गुफाओं में मिली इस मूर्ति पर खोज कर रहे पुरातत्ववेत्ताओं का मानना है कि यह भगवान विष्णु के चौथे अवतार नरसिंह की प्रतिमा है। इस पर खोज अब भी चल रही है।

शुरू में पुरातत्ववेत्ताओं ने माना था कि यह प्रतिमा किसी नर जीव की है। हालांकि, बाद में यह साबित हुआ कि यह न तो नर है और न ही मादा। बाद के दिनों में खुदाई के दौरान जर्मनी में कुछ इसी तरह की अन्य प्रतिमाएं भी मिली हैं।

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हिन्दू पुराणों में भगवान नरसिंह का जिक्र है। वह भगवान विष्णु के चौथे अवतार थे। भगावन विष्णु ने हिरण्यकश्यप के वध के लिए नरसिंह का अवतार लिया था। दरअसल, राक्षसराज हिरण्यकश्यप को यह वरदान प्राप्त था कि वह न तो दिन में मर सकता है, न ही रात में। न ही अस्त्र से, न ही शस्त्र से। न ही सुबह में, न ही रात में। न घर के अंदर, न ही बाहर।



यही वजह है कि भगवान विष्णु को नरसिंह का अवतार लेना पड़ा। वह न तो इन्सान थे, न ही जानवर। नरसिंह का सिर शेर का था, तो धड़ इन्सान का। नरसिंह ने हिरण्यकश्यप को मारने के लिए गोधुली बेला का समय चुना, क्योंकि उस वक्त न तो दिन था और ही रात।

40 हजार साल पुरानी भगवान नरसिंह से जोड़ी जा रही इस प्रतिमा को जर्मनी के उल्मेर म्युजियम में रखा गया है।


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