5 हजार साल पहले अरब सागर में डूब गई द्वारका नगरी के अब मिल रहे हैं अवशेष

Updated on 14 Sep, 2017 at 9:30 pm

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द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने द्वारका नामक एक नगरी बसायी थी। पौराणिक कथाओं के अनुसार, द्वारका एक बेहद उन्नत नगरी थी, जो भगवान श्रीकृष्ण की राजधानी भी थी। मान्यताओं के मुताबिक, भगवान कृष्ण यहां करीब 36 साल तक रहे थे। उनके प्राण त्यागने के कुछ सालों बाद द्वारका नगरी समुद्र में डूब गयी।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के निर्देशन में वर्ष 2005 में पहली बार भारतीय नौसेना के गोताखोरों ने अरब सागर में द्वारका नगरी के डूबे होने की बात कही थी। इसके कुछ अवशेष निकाले गए और यह बात सच साबित हुई।

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खोजकर्ताओं के मुताबिक, ये अवशेष 40 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में फैले हुए हैं। ये अवशेष चूना-पत्थर की शक्ल में हैं। पुरातत्व विशेषज्ञों ने साफ किया है कि ये खंड बहुत ही विशाल और समृद्धशाली नगर और मंदिर के अवशेष हैं। इन अवशेषों के करीब 200 से अधिक नमूने समुद्र से निकाले गए हैं।

हालांकि, द्वारका नगरी के डूबने पर विशेषज्ञों में मतभेद हैं।

कुछ का मानना है कि हिमयुग के समापन पर जब समुद्र का जलस्तर बढ़ा होगा तब कई तटवर्ती नगर इसमें डूब गए होंगे और द्वारका नगरी भी उन्हीं में एक थी। हालांकि, सवाल उठते हैं कि करीब 10 हजार साल पहले हिमयुग का समापन हुआ था और द्वारका नगरी का निर्माण करीब 5 हजार साल पहले हुआ था।

पौराणिक कथाओं के मुताबिक, द्वारका नगरी के नष्ट होने के पीछे दो मान्यताएं हैं। एक माता गांधारी द्वारा श्रीकृष्ण को दिया गया श्राप और दूसरा ऋषियों द्वारा श्रीकृष्ण के पुत्र सांब को दिया गया श्राप।

गांधारी ने भगवान श्रीकृष्ण को महाभारत के युद्ध के लिए दोषी करार दिया था। उन्होंने श्राप दिया था कि उनके यदुवंश का नाश हो जाएगा। वहीं, एक अन्य मान्यता के मुताबिक, भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र सांब द्वारा किए गए हंसी-मजाक से क्रोधित होकर एक ऋषि ने उन्हें श्राप दिया था कि यदुवंश का नाश हो जाएगा।


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