आज भी जीवित हैं पवनपुत्र हनुमान, कलियुग में यहां कर रहे हैं वास

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Updated on 31 Mar, 2018 at 7:08 pm

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पवन पुत्र हनुमान हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं। शास्त्रों के अनुसार, भगवान राम के अनन्य भक्त हनुमान चैत्र महीने की पूर्णिमा तिथि को धरती पर अवतरित हुए थे। इस साल यह तिथि 31 मार्च को पड़ी है। यह दिन देश भर में हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाता है। लोग व्रत रखते हैं, हनुमान जी की पूजा करते है और उनसे हर कठिनाई और बुरे साए से दूर रखने की मनोकामना करते हैं। ऐसा माना जाता है कि हनुमान बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। वह अपनी भक्ति से प्रसन्न होकर भक्तों को मनवांछित फल प्रदान करते हैं।

 

 


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हनुमान जी को भारत का सुपर हीरो कहना गलत नहीं होगा। ये बजरंगबली की महिमा ही है कि उनका नाम लेने भर से डर भाग जाता है और मन को शांति की अनुभूति होती है।

 

आज हम आपके लिए हनुमान से जुड़े ऐसे तथ्य लेकर आए हैं, जो इस बात का संकेत देते हैं कि पवन पुत्र हनुमान इस कलयुग में भी हमारे बीच मौजूद हैं। उन्होंने अपना शरीर नहीं त्यागा है।

 


 

‘रामायण’ और ‘महाभारत’ में है चिरंजीवी होने का जिक्र

 

महान ग्रंथों ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ में हनुमान जी सहित सात लोगों के ‘चिरंजीवी’ अर्थात अमर होने का जिक्र मिलता है। इन सात लोगों में प्रहलाद के परपुत्र ‘बलि’, रावण के भाई ‘विभीषण’, द्रोणाचार्य के पुत्र ‘अश्वत्थामा’, विष्णु भगवान के छठे अवतार ‘परशुराम’, महाभारत के राजगुरु ‘कृपाचार्य’, महाभारत के रचियता ‘वेद व्यास’ और  मृकंदु के पुत्र ‘मार्कंडेय’ शामिल हैं।

 

आपने ग्रंथों या पुराणों में ये पढ़ा भी होगा कि जब-जब भगवान पृथ्वी पर मानव रूप में अवतरित हुए, उन्हें पृथ्वी लोक को छोड़ना पड़ा। चाहे वह भगवान राम हों या भगवान कृष्ण, इन्हें अपने मानव शरीर को त्यागना पड़ा, लेकिन हनुमान जी का पृथ्वी लोक को छोड़कर जाने का जिक्र किसी ग्रन्थ या पुराण में नहीं मिलता है।

 

 

भगवान राम ने दिया अमरत्व का वरदान

 

रामायण के चालीसवें अध्याय में इस बात का उल्लेख किया गया है कि जब श्रीराम लंका पर विजय हासिल कर लौटे तो उन्होंने हनुमान जी से प्रसन्न होकर उनसे कहा – “संसार में मेरी कथा जब तक प्रचलित रहेगी, तब तक तुम्हारी कीर्ति अमिट रहेगी, और तुम्हारे शरीर में प्राण भी रहेंगे।”

 


 

चारों युगों में हनुमान जी के अस्तित्व में होने का प्रमाण

 

सतयुग में ‘शिवजी’ का रूप

 



‘शंकर सुवन केसरी नंदन, तेज प्रताप महा जग वंदन’, ‘हनुमान चालीसा’ के इस पद में हनुमान जी को भगवान शंकर का स्वरूप कहा गया गया है। सतयुग में हनुमान जी ‘रूद्र अवतार’ में थे।

 

त्रेतायुग में ‘हनुमान’ का रूप

 

त्रेतायुग में पवनपुत्र हनुमान ने केसरी नंदन के रूप में जन्म लिया और वह भगवान राम के भक्त बनकर उनके साथ छाया की तरह रहे।

 

द्वापर युग में भीम और हनुमान जी का प्रसंग

 

महाभारत में एक प्रसंग का जिक्र मिलता है जब हनुमान भीम से अपनी पूंछ हटाने को कहते हैं और भीम अपनी पूरी ताकत लागाने के बाद भी पूंछ को टस से मस नहीं कर पाते।

 

कलियुग में यहां निवास करते हैं महाबली हनुमान

 

‘श्रीमद भगवत गीता’ में ऐसा उल्लेख किया गया है कि कलियुग में हनुमान जी हिमालय के कैलाश पर्वत के उत्तर में स्थित ‘गंधमादन पर्वत’ पर आज भी निवास करते हैं।


 

इन लोगों से मिलने आते हैं पवनपुत्र हनुमान

 

कहा जाता है कि जब भगवान राम ने अपना शरीर त्यागा, तो हनुमान जी लंका की ओर प्रस्थान कर गए। वहां के कबीला वासियों ने उनकी खूब सेवा और सत्कार किया। फिर हनुमान जी ने उनसे प्रसन्न होकर ये वचन दिया कि वह हर 41 साल में उनसे मिलने जरूर आया करेंगे।


 

एक किताब में दर्ज की जाती हैं हनुमान जी से हुई सारी बातें

 

कहा जाता है कि आखिरी बार हनुमान जी कबीले वालों से मिलने मई 2014 में आए थे। इसके बाद अब वह साल 2055 में दोबारा आएंगे। इतना ही नहीं, कबीले वालों और हनुमान जी के बीच इस मुलाकात के दौरान जो बातचीत होती है उसे कबीले का मुखिया लॉग बुक में दर्ज करता है। इस पर कई रिसर्च संगठनों द्वारा अध्यन भी किया जा रहा है।

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