क्या आप जानते हैं मालगाड़ी पर क्यों लिखा होता है “नॉट टू बी लूज़ शंटेड”?

Updated on 30 Oct, 2017 at 3:16 pm

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भारतीय रेलवे देश की अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है। लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचाने के साथ ही ये माल ढुलाई का भी काम करती है। यदि रेलवे न हो तो देश के अलग-अलग हिस्सों में सामान पहुंचाना बहुत मुश्किल हो जाएगा। वैसे हम से शायद ही कोई ऐसा होगा, जिसने ट्रेन का सफर न किया हो और इस सफर के दौरान कई बार ट्रेन पर लिखे ढेर सारे शब्द भी देखे होंगे आपने। हालांकि, अक्सर उसका मतलब नहीं पता होता।

आपने कभी न कभी मालगाड़ी भी देखी ही होगी और उस पर एक वाक्य लिखा होता है “नॉट टू बी लूज़ शंटेड’’ क्या आप जानते हैं कि ये क्यों लिखा होता है और इसका मतलब क्या है? नहीं, तो चलिए हम बता देते हैं।


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दरअसल, भारत में जानवरों के साथ ही लिक्विड और गैस को भी मालगाड़ी के ज़रिए एक स्थान से दूसरे स्थान भेजा जाता है। आमतौर पर “नॉट टू बी लूज़ शंटेड’’ वाक्य उन माल डिब्बों पर लिखा होता है जिनमें खतरनाक और स्थानांतरित करने वाले पदार्थ भेजे जाते हैं, जैसे- पाइप्स, वाहन, पशु, तेल, डीज़ल, पेट्रोल व अन्य ज्वलनशील पदार्थ।



अपने गंतव्य जैसे थर्मल पावर प्लांट, सीमेंट फैक्ट्री आदि पहुंचने पर मालगाड़ी से इन सामानों को उतारने के लिए शंटिंग लोकोमोटिव का इस्तेमाल किया जाता है। ये लोकोमोटिव माल डिब्बे को धीरे से धक्का देकर प्लैटफॉर्म तक पहुंचाते हैं। जब ये डिब्बे अनलोडिंग प्लैटफॉर्म पर पहुंच जाते हैं तो इन्हें फुल रेक की मदद से रोका जाता है। शंटिंग कहीं और कभी भी की जा सकती है। साथ ही शंटिंग के जरिए लोकोमोटिव हर माल डिब्बे को बारी-बारी से खाली करवाता है।

जिन डिब्बों में ज्वलनशील और खतरनाक पदार्थ लाए जाते हैं उनमें किसी तरह का लीकेज या कोई दुर्घटना न हो इसलिए उस डिब्बे पर “नॉट टू बी लूज़ शंटेड’’ लिख दिया जाता है। पत्र, भारी उपकरण, सीमेंट बोरी, कंकड, अनाज आदि लाने वाले डिब्बों की रोज़ाना शंटिंग की जाती है। जब ये अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं तो अधिकारी इन डिब्बों पर लगी सील हटाकर माल उतरवाते हैं।

तो अब आप समझ गए होंगे कि “नॉट टू बी लूज़ शंटेड’’ समान को सुरक्षित पहुंचाने और किसी तरह की दुर्घटना रोकने के लिए लिखा जाता है।


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