वैज्ञानिकों ने अनजाने में कर ड़ाला बड़ा आविष्कार, जिसकी उम्र है सैकड़ों साल

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Updated on 28 Apr, 2016 at 9:29 pm

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आज के समय में इलेक्टॉनिक गैजेट का चलन बेहद प्रखर है। जब भी आप और हम स्मार्टफोन या लैपटॉप या कोई भी इलेक्ट्रॉनिक सामान खरदीने जाते है, उसके दाम के बाद सबसे अहम सवाल जो ज़हन में आता है वो है कि उसमें इस्तेमाल हुई बैटरी कितने सालों तक चलेगी।

आजकल लैपटॉप या स्मार्टफोन की बैटरीज को दो या तीन साल में बदलने की ज़रूरत पड़ ही जाती है। यही कारण है कि लोग ऐसी बैटरी की तलाश में है जो कई सालों, लम्बे समय तक चले। और अब यह लग रहा है कि यह इंतज़ार ख़त्म हो गया है।

कैलिफोर्निया इर्विन विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अनजाने में एक ऐसी बैटरी बनाई है, जिसे सैकड़ों से हज़ारों बार रिचार्ज किया जा सकता है।

सरल भाषा में बताएं तो, यह बैटरी कई सालों तक चल सकेगी, जिसे बदलने की भी ज़रूरत नहीं पड़ेगी।

शोधकर्ताओं ने इस बैटरी को बनाने में नैनोवायर्स का इस्तेमाल किया है। क्या होते है नैनोवायर्स?

हां, लेकिन नैनोवायर्स के साथ एक दिक्कत यह है कि लम्बे समय तक इस्तेमाल होने के बाद यह टूट जाती है। इसे रोकने के लिए शोधकर्ताओं ने मैंगनीज डाइऑक्साइड की परत वाली नैनोवायर्स को प्लेक्सिग्लास नामक एक तरल पदार्थ में मिलाकर तैयार किया है।


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यह मैंगनीज डाइऑक्साइड की परत और ख़ास तरह का तरल पदार्थ, नैनोवायर्स को टूटने से रोकने में कारगर साबित होगा।

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यूसीआई के रसायन विज्ञान विभाग के अध्यक्ष रेजिनाल्ड पैनर का इस ख़ास बैटरी के आविष्कार के बारे में कहना है कि एक शोधकर्ता ने बस ऐसे ही खेल-खेल में बैटरी को एक तरल पदार्थ में डाल दिया। बाद में देखा तो सामने आया कि इस तरल पदार्थ के संपर्क में आते ही बैटरी की क्षमता हज़ारों गुना बढ़ गई।

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शोधकर्ता हाथ में नैनोवायर जैल बैटरी लिए uci

बल्कि, शोधकर्ता ने 200,000 बार बैटरी को चार्ज और डिस्चार्ज किया। वहीं एक सामान्य बैटरी का ज़्यादा से ज़्यादा इस्तेमाल करने का चक्र 30 से 40 बार का होता है।

अब इंतज़ार है तो इसके बाजार में उतरने का।


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